18 सितम्बर – बलिदान दिवस पिता- पुत्र राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह जो तोप से उड़ा देने तक प्रजा को देते रहे युद्ध का संदेश

कितना सच है दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल .. इस गाने में कितनी सच्चाई है ये ऐसे

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3 सितम्बर- आहुति दिवस बाल वीरांगना कुमारी मैना. 1857 महायुद्ध में सबसे कम आयु की आहुति. मात्र 13 वर्ष, जिन्हें नकली कलमकारों ने इतिहास में नहीं दिया स्थान

ऐसी वीरांगनाओं के इतिहास को भुला कर ना जाने किसे किसे आयरन आदि की पदवी दे डाली गयी ..

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24 जुलाई – #बलिदान_दिवस पर नमन है अंग्रेजो की जड़ें हिला देने वाले उस वीर चैन सिंह को जिन्हें कहा जाता है मध्यप्रदेश का मंगल पाण्डेय

बिना खड्ग बिना ढाल के नहीं चैन का जीवन ही तलवारों के साथ बीता था ..

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मंगल पाण्डेय के खिलाफ अंग्रजो को मिल नहीं रहे थे गवाह..तभी सामने आया था वो “शेख” जो अनंत काल तक गुनाहगार रहेगा भारत का. इसका छिपाया नकली कलमकारों ने

जानिये एक गद्दार के बारे में जिसका नाम छिपा गये झोलाछाप इतिहासकार .

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मंगल पाण्डेय संग एक और भारतीय सैनिक चढा था फांसी जिनका नाम आज तक कहीं नहीं लिया गया .. जानिये कौन था वो दूसरा बलिदानी – “जन्म दिवस विशेषांक”

एक ऐसा इतिहास जो आप ने सोचा भी नहीं होगा क्योकि छिपाया गया है आप से .

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19 जुलाई – स्वतंत्र संग्राम की प्रथम आहुति मंगल पाण्डेय जन्मदिवस. इनकी आग उगली बंदूक प्रमाण है कि ‘बिना खड्ग बिना ढाल” वाली लाइन गलत है

आज भी जिसके नाम से होता, रोम रोम में कम्पन है .
भारत के उस बाहुबली की हिम्मत का अभिनंदन है..

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30 जून – आज ही “भारत माता की जय” बोल कर झारखण्ड में शुरू हुआ था संथाल विद्रोह ..खुद अंग्रेजों ने लिखा – “जब तक ड्रम बजता रहा, तब तक संथाल लड़ता रहा.. बलिदान हुए थे 20 हजार

क्या था ये युद्ध और कितने हुए बलिदान , जानिए हमारे संग ।

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22 जून- सेठ अमरचन्द बांठिया बलिदान दिवस.. जिंदगी भर कमाई पूरी पूँजी दे दी क्रांतिकारियों को जिसे अंग्रेजो ने माना अपराध और दे दी फांसी

जानिये कौन थे ये महान व्यक्तित्व जिन्हे माना गया १८५७ का भामाशाह

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18 जून- भारतीय नारी के शक्ति, सम्मान और स्वाभिमान की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई जी को उनके बलिदान दिवस पर बारम्बार नमन और वंदन

ये वो महाशक्ति हैं जिन्होंने १८५७ की क्रांति की नींव में पाया स्थान ..

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13 जून – भाई का विवाह और गर्भवती पत्नी दोनों को छोड़ कर कूद गए 1857 के संग्राम में और कई अंग्रेजो का वध करते हुए खुद भी आज ही सदा के लिए सो गए “राजा बलभद्र सिंह”

१८५७ के उस अमर योद्धा की कहानी जिसे नकली इतिहासकारों ने भुला दिया ..

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