17 फरवरी- आज़ादी की नींव के पत्थर वासुदेव बलवंत फड़के ने आज ही प्राप्त की थी अमरता. वो महायोद्धा जो आज भी दूर है इतिहास के स्वर्णिम पन्नों से

कुछ चाटुकार इतिहासकारों के षडयंत्र के कारण भुला दिए गए अनंत अमर बलिदानियों में से एक श्री वासुदेव बलवंत फड़के

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर 1857 के बलिदानियों को मिलेगा सम्मान.. इन भूले बिसरे पन्नो को पलटने वाले राजनेता हैं नरेंद्र मोदी

1857 का स्वतंत्रता संग्राम कुछ कलमकारों के साथ साथ तमाम नेताओ के लिए याद करना तो दूर चर्चा का भी

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18 जनवरी – 1857 के 18 क्रांतिवीरों ने आज ही रायपुर में काट लिया था अत्याचारी मेज़र सिडवेल का सिर, जिनके मुखिया थे हनुमान सिंह.. इन सबको बाद में उड़ा दिया गया तोप से

नकली कलमकारों की साजिश के शिकार गुमनाम बलिदानियों की जिस गौरवगाथा को सुदर्शन न्यूज हर दिन आपके सामने लाता है

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9 जनवरी- बलिदान दिवस, राजा नाहर सिंह..1857 के इस क्रांतिवीर ने अंतिम इच्छा में “अंग्रेजों का नाश” मांगा था. गिरफ्तारी में गद्दारी थी इलाहीबख्स की

आजादी के गौरवशाली इतिहास के असल पन्ने वो नहीं जो हमें पढ़ाये या कहा जाय तो रटाये जा रहे हैं..

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7 जनवरी – 1857 में क्रूर कैरी, मिल्स, कॉनेल व मानसन को मारने वाले अमीन सयाजीराव को आज उड़ा दिया गया था तोप से. पर चर्चा में चरखा रहा

ये भारत के वो गुमनाम वीर हैं जिनके गुमनामी के दोषी अंग्रेजो से ज्यादा वो नकली कलमकार हैं जिन्होंने इतिहास

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3 जनवरी – जयंती वीर नरेश कट्टबोमन.. दक्षिण भारत पर उठती अंग्रेजो की आंख को फोड़ दिया और क्लार्क का सर काट कर झूल गए थे फाँसी

इनके भी इतिहास को जान बूझ कर छिपाया गया.. ये शौर्य व पराक्रम की वो गौरवगाथा थे जिनका जीवन ही

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29 दिसंबर – धौलाना (हापुड़, UP) के 14 सपूतों को आज ही दी गई थी फाँसी जिन्होंने 1857 के युद्ध में जला कर राख कर दिए थे अंग्रेजों के ठिकाने.. उनकी लाशों के साथ जो हुआ वो अब तक कहीं नहीं हुआ

यदि ये गौरवगाथा बताई गई होती तो न सिर्फ अंग्रेजो के तमाम पाप दुनिया जान पाती बल्कि उन नकली कलमकारों

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28 दिसंबर – 1857 क्रांति के अग्रदूत राव रामबख्श सिंह जी बलिदान दिवस.. इन्हें फाँसी देने वाली रस्सी 2 बात टूटी, लेकिन तथाकथित इतिहासकारों की नींद नही

सम्भवतः आप मे से तमाम इनका नाम नहीं जानते होंगे, अगर जानते भी होंगे तो बहुत कम.. इन्होंने खड्ग और

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12 दिसंबर – ब्रिटिश बंदूकों के विरुद्ध मेघालय में तीरों से लड़े गए युद्ध के महानायक थोगम संगमा बलिदान दिवस. महिलाओं – बच्चों ने भी कटाये थे शीश पर उन्हें नहीं मिला इतिहास में स्थान

ये सर्वविदित है कि देश को उस के वास्तविक इतिहास से वंचित रखने के तमाम प्रयास किये गए हैं ..,

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22 नवम्बर – वीरांगना झलकारी बाई जयंती. 1857 महायुद्ध की वो महानायिका नारी शक्ति जिनकी यशगाथा सवाल है “बिना खड्ग बिना ढाल” वाले गाने पर

भले ही नकली कलमकारों व कथित इतिहासकारों ने नारी शक्ति की उस प्रतीक के साथ न्याय नहीं किया हो लेकिन

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