बधाई दीजिये हिन्दुस्तान की नई उड़नपरी, हिन्द की बेटी #हिमा_दास को जिसने खेत खलिहान से बाहर निकलकर हिंदुस्तान के लिए जीता गोल्ड मैडल.

हिमा दास– ये नाम सुबह से ही ट्विटर पर टॉप ट्रेंड कर रहा है. कल तक जिस हिमा दास को कोई जानता तक नहीं था वो हिमा दास आज पूरे भारत की चाहती बेटी बन चुकी है तथा पूरा देश हिमा दास को बधाई दे रहा है. आपको बता दें कि हिमा दास हिन्दुस्तान की नई उड़नपरी बनकर उभरी है जिसने विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में इतिहास रच दिया है. हिमा ने आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है. हिमा दास की स्वर्णिम उपलब्धि ने पूरी देश को झूमने पर मजबूर कर दिया है तथा अब हर व्यक्ति की जुबान पर भारतमाता की बेटी हिमा दास का ही नाम है. धान की खेती करने वाले किसान की बेटी ने खेत खलिहान से बाहर निकलकर देश को सोना दिलाया है.

आपको बता दें कि हिमा दास की ये उपलब्धि ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि यह पहली बार है कि भारत को आईएएएफ की ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल हुआ है. उनसे पहले भारत का कोई भी खिलाड़ी जूनियर या सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड नहीं जीत सका था, और तो और, फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह और पीटी उषा भी कमाल नहीं कर पाए थे. इस लिहाज से अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर भारत की ये ऐतिहासिक जीत है. हिमा ने यह दौड़ 51.46 सेकेंड में पूरी की. किसी अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक पर भारतीय एथलीट के हाथों में तिरंगा और चेहरे पर विजयी मुस्कान लिए हुए जिस तस्वीर का इंतज़ार लंबे वक़्त से हर हिंदुस्तानी कर रहा था., इंतज़ार की यह घड़ी गुरुवार देर रात उस समय खत्म हुई जब फ़िनलैंड के टैम्पेयर शहर में 18 साल की हिमा दास ने इतिहास रचते हुए आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में पहला स्थान प्राप्त किया.

आपको बता दें कि दौड़ के 35वें सेकेंड तक हिमा शीर्ष तीन खिलाड़ियों में भी नहीं थीं, लेकिन बाद में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और इतिहास बना लिया. स्पर्धा के बाद जब हिमा ने गोल्ड मेडल लिया और सामने राष्ट्रगान बजा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. राष्ट्रगान की ध्वनि पर भारतीय तिरंगा सबसे ऊपर गया तथा हिमा को गोल्ड पहिनाया गया तो हिमा अपने जज्बातों को काबू नहीं कर पाई तथा खुशी से उनकी आँखों से आंसू बहने लगे. हिमा ने वो कर दिखाया जो हिन्दुस्तान के इतिहास में आज तक नहीं हुआ था. सुबह होते ही जब देशवासियों को पता चला कि हिन्दुस्तान को नई उड़नपरी मिल गई है जिसने दूर देश फ़िनलैंड में स्वर्ण पदक जीत लिया है. इसके बाद हिमा की इस उपलब्धि पर पूरा देश जश्न में डूब गया तथा भारतमाता की बेटी, हिन्दुस्तान की नयी उडनपरी हिमा दास को सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. आम जनता से लेकर लोकप्रिय हस्तियों तक ने हिमा दास को बधाई दी है.

आपको बता दें कि हिमा दास आज जिस मुकाम पर है, तो उसका रास्ता आसान नहीं रहा है. उनकी इस अपार सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और हिम्मत का काफी बड़ा किरदार है. हिमा असम के एक साधारण किसान की बेटी हैं, जो चावल की खेती करते हैं. वह बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. असम की रहने वाली हिमा की इस अंतरराष्ट्रीय कामयाबी के बाद फ़िनलैंड से लेकर पूरे हिंदुस्तान तक चर्चा है. गुवाहाटी में मौजूद हिमा के कोच निपुण दास की आवाज़ में गर्व और खुशी के एहसास एक साथ महसूस किए जा सकते हैं.
वे हंसते हुए कहते हैं कि मुझे यक़ीन था कि हिमा फ़िनलैंड में कुछ बड़ा करके आएगी, लेकिन वह गोल्ड जीत लेगी इसका अंदाज़ा रेस शुरू होने से पहले तक नहीं था. हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता, उनके पीछे रोमानिया की एंड्रिया मिक्लोस 52.07 सेकेंड के साथ दूसरे और अमरीका की टेलर मैनसन 52.07 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.

हिंदुस्तान में आज तमाम लोग हिमा की चर्चा कर रहे हैं लेकिन शायद ही किसी ने उन्हें फ़िनलैंड के ट्रैक पर लाइव दौड़ते हुए देखा होगा. लेकिन एक शख्स थे जिन्हें हिमा की इस रेस का बेसब्री से इंतज़ार था. वे थे उनके कोच निपुण दास. हिमा के यूं अंतिम वक़्त में रफ़्तार पकड़ने पर निपुण दास कहते हैं, ”रेस में जब आखिरी 100 मीटर तक हिमा चौथे स्थान पर थी तो मुझे यक़ीन हो गया था कि वह इस बार गोल्ड ले आएगी, मैं उसकी तकनीक को जानता हूं वह शुरुआत में थोड़ी धीमी रहती है और अपनी पूरी ऊर्जा अंतिम 100 मीटर में लगा देती है, यही उसकी खासियत है.” निपुण कहते हैं, ”हिमा को ट्रैक के कर्व (मोड़) पर थोड़ी समस्या होती है, यह बहुत हल्की सी दिक्कत है, यही वजह है कि शुरुआत में वह हमेशा पीछे ही रहती है. लेकिन जब ट्रैक सीधा हो जाता है तो वह तेज़ी से रिकवर करते हुए सबसे आगे निकल जाती है.”निपुण दास के पास हिमा साल 2017 के जनवरी महीने में आईं, असम के नौगांव ज़िले की रहने वाली हिमा राजधानी गुवाहाटी में एक कैम्प में हिस्सा लेने आई थीं. जब निपुण की नज़र उन पर पड़ी.

निपुण इस मुलाक़ात के बारे में बताते हैं, ”वह जनवरी का महीना था हिमा एक स्थानीय कैम्प में हिस्सा लेने राजधानी गुवाहाटी आई थी, वह जिस तरह से ट्रैक पर दौड़ रही थी, मुझे लगा कि इस लड़की में आगे तक जाने की काबिलियत है.” इसके बाद निपुण हिमा के गांव में उनके माता पिता से मिलने गए और उनसे कहा कि वे हिमा को बेहतर कोचिंग के लिए गुवाहाटी भेज दें. हिमा के माता-पिता गुवाहाटी में उनके रहने का खर्च नहीं उठा सकते थे. लेकिन बेटी को आगे बढ़ते हुए भी देखना चाहते थे. इस मुश्किल स्थिति में निपुण ने ही एक रास्ता निकाला. वे बताते हैं, ”मैंने हिमा के माता-पिता से बातचीत की और उन्हें कहा कि हिमा के गुवाहाटी में रहने का खर्च मैं खुद उठाऊंगा, बस आप उसे बाहर आने की मंजूरी दें. इसके बाद वे हिमा को बाहर भेजने के लिए तैयार हो गए.”शुरुआत में हिमा को फ़ुटबॉल खेलने का शौक था, वे अपने गांव या ज़िले के आस पास छोटे-मोटे फ़ुटबॉल मैच खेलकर 100-200 रुपये जीत लेती थी. फ़ुटबॉल में खूब दौड़ना पड़ता था, इसी वजह से हिमा का स्टैमिना अच्छा बनता रहा, जिस वजह से वह ट्रैक पर भी बेहतर करने में कामयाब रहीं. निपुण कहते हैं कि जब उन्होंने हिमा को फ़ुटबॉल से एथलेटिक्स में आने के लिए तैयार किया तो शुरुआत में 200 मीटर की तैयारी करवाई, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे 400 मीटर में अधिक कामयाब रहेंगी.

निपुण कुमार ने बताया कि हिमा एक संयुक्त परिवार से हैं. उनके घर में कुल 16 सदस्य हैं. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि बस अपने खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है. निपुण इस बारे में बताते हैं, ”हिमा के घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज़्यादा अच्छी भी नहीं है, उनके पिता किसान हैं, खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि मां घर संभालती हैं.” हिमा जिस जगह से आती हैं, वहां अक्सर बाढ़ भी आती रहती है, इस वजह से भी परिवार को कई बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. निपुण बताते हैं,”नौगांव में अक्सर बाढ़ के हालात बन जाते हैं, वह जगह बहुत अधिक विकसित नहीं है, जब हिमा गांव में रहती थी तो बाढ़ की वजह से कई-कई दिन तक प्रैक्टिस नहीं कर पाती थी, क्योंकि जिस खेत या मैदान में वह दौड़ की तैयारी करती, बाढ़ में वह पानी से लबालब हो जाता. यही वजह थी कि मैं उसे गुवाहाटी ले आया.’हिमा को मिली इस कामयाबी के बाद पूरा देश उन्हें बधाइयां दे रहा है. प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक ने उन्हें इस ऐतिहासिक कामयाबी के लिए ट्वीट कर बधाई दी है. हिमा ने भी अपने फेसबुक के माध्यम से सभी का धन्यवाद दिया है कि और कहा है कि वे देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर बेहद खुश हैं, वे आगे भी और अधिक मेडल जीतने की कोशिश करेंगी. जिस हिमा दास को अभी तक गिने चुने लोग जानते थे वो हिमा दास आज पूरे भारत की लाड़ली बन चुकी है तथा पूरा हिन्दुस्तान आज हिमा दास की चर्चा कर रहा है. हिमा दस के इस शानदार प्रदर्शन के देश को उम्मीद है कि हिमा 2020 के ओलंपिक खेलों में भारत को सोना दिलाएंगी.

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *