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भारतीय क्रिकेट का वो अपराजित तथा साहसी योद्धा है गौतम गंभीर जिसने कभी हार नहीं मानी तथा सैनिक की भांति लड़ा और खेला

4 दिसंबर 2008 का दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए आघात की तरह था जब 2007 टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 एकदिवसीय वर्ल्डकप विजेता भारतीय टीम के हीरो रहे सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का एलान कर दिया. गौतम गंभीर के संन्यास के एलान के बाद सोशल मीडिया पर भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा तथा क्रिकेट प्रेमियों ने गंभीर को आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं दी. चाहे 2007 टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में गंभीर द्वारा  विषम परिस्थितियों में खेली गई 75 रनों ए पारी हो या फिर 2011 एकदिवसीय वर्ल्डकप फाइनल में खेली गई 97 रनों की पारी हो, भारतीय क्रिकेटप्रेमियों की यादों में हमेशा जीवित रहेगी. जब भी भारतीय टीम के वर्ल्ड कप जीत का जिक्र होगा तो उसमें गौतम गंभीर का जिक्र सबसे पहले होगा. अगर गंभीर ने दोनों फाइनल्स में जुझारूपन न दिखाया होता तो संभवतः भारत विजेता न बनता.

गौतम गंभीर! भारटीय क्रिकेट का वो महानतम नाम जो जितनी शांति के साथ बल्लेबाजी करता था तो विपक्षी को जवाब देने में उतना ही ज्यादा अग्रेसिव होता था. गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट का वो अपराजित योद्धा है जिसने कभी हार नहीं मानी तथा जिसने हमेशा आगे आकर भारतीय टीम को न सिर्फ संभाला बल्कि जिताया भी. गौतम गंभीर की जिस बात ने लोगों का ध्यान अपनी खींचा वो थी उनकी कभी हार न मानने वाली प्रतिबद्धता जिसकी सभी ने प्रशंसा की और गंभीर की बेबाक टिप्पणियां जिस पर लोगों ने आंखे तरेरी लेकिन गंभीर ने इसकी परवाह नहीं की तथा अपने सिद्धांतों से, सोच से कभी समझौता नहीं किया. कुछ इसी तरह से रहा गौतम गंभीर का भारतीय क्रिकेट में 15 साल का करियर जिसमें उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की और अब गंभीर रिटायरमेंट ले चुके हैं.

वैसे गंभीर के शानदार क्रिकेट करियर का अंत तो तभी हो गया था, जब उन्हें इस साल के शुरू में आईपीएल में छह मैचों में असफलता के बाद हटने के लिये मजबूर किया गया और मंगलवार को आधिकारिक तौर पर उन्होंने हमेशा के लिये इस खेल को अलविदा कह दिया. लेकिन भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों के बीच वह अपनी विशेष छाप छोड़कर गये हैं. गंभीर भले ही सुनील गावस्कर, तेंदुलकर, वीरेन्द्र सहवाग की तरह रिकॉर्ड नहीं बना सके इसके बावजूद भारतीय टीम का 2007 से लेकर 2011 तक के सफर को नयी दिल्ली के राजिंदर नगर में रहने वाले बायें हाथ के इस बल्लेबाज के बिना पूरा नहीं हो सकता है. गंभीर भारतीय   क्रिकेट का वो अनमोल हीरा है जिसने अपने दम पर दो वर्ल्ड कप जिताए.

गौतम गंभीर हमेशा से सहवाग के अविश्वसनीय सलामी जोड़ीदार रहे और 2009 का आईसीसी का वर्ष का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज उनकी विशिष्ट उपलब्धि थी. वह विश्व कप के दो फाइनल (2007 में विश्व टी20 और 2011 में वनडे विश्व कप) में सर्वोच्च स्कोरर रहे. न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर में 13 घंटे क्रीज पर बिताने के बाद खेली गयी 136 रन की पारी टेस्ट क्रिकेट में हमेशा याद रखी जाएगी. क्रीज पर पांव जमाये रखने के लिये जरूरी धैर्य और कभी हार नहीं मानने का जज्बा दो ऐसी विशेषताएं जिनके दम पर गंभीर शीर्ष स्तर पर बने रहे. यहां तक कि 2003 से 2007 के बीच का भारतीय क्रिकेट भी गंभीर के बिना पूरा नहीं माना जाएगा. इस बीच वह टीम से अंदर बाहर होते रहे.

उन्होंने जब 2007-08 में मजबूत वापसी की तो इसके बाद सहवाग के साथ भारत की टेस्ट मैचों में सबसे सफल जोड़ी बनायी लेकिन 2011 विश्व कप के बाद उनका करियर ढलान पर चला गया तथा इंग्लैंड दौरे ने रही सही कसर पूरी कर दी. आईपीएल में हालांकि उन्होंने अपनी नेतृत्वक्षमता का शानदार परिचय दिया. कोलकाता नाइटराइडर्स ने उनकी अगुवाई में ही दो खिताब जीते लेकिन गंभीर चयनकर्ताओं की नजर में टीम में जगह नहीं बना सके. गंभीर देश की वर्तमान राजनैतिक स्थिति, सामाजिक मुद्दे पर बेबाक टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते हैं. गंभीर की दूसरी पारी भी घटनाप्रधान रहने की संभावना है चाहे वह बीसीसीआई के बोर्ड रूम में हो या जनता के प्रतिनिधि के रूप में. उन्हें किसी का भय नहीं और वह हमेशा अपने दिल की बात कहने वाला इंसान के रूप में जाने जाते हैं. अब देश को इन्तजार है अपने हीरो गौतम गंभीर की नई पारी का.

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