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भारत से सीरिज जीत कर शैम्पेन के साथ जश्न मना रहे थे इंग्लैड के खिलाडी .. लेकिन उसी समय उसके 2 मुस्लिम खिलाड़ी कर रहे थे कुछ और

भले ही कुछ देशो के खिलाडी न सिर्फ धर्म और परम्पराओं से सिर्फ आधुनिकता के नाम पर कोसों दूर हो गये हों और यहाँ तक कि उस देश से भी खेलने को लालायित रहते हों जो उसी समय उनके देश के सैनिको के शीश काट रहा हो.. उस समय स्वघोषित बुद्धिजीवियों द्वारा गढ़े गए खेल भावना आदि के सिद्धांत इतने ऊपर आ जाते हैं की वो न सिर्फ धर्म से ऊपर रखे जाने लगते हैं बल्कि राष्ट्र व् राष्ट्र की सेना से भी ऊपर खड़े कर दिए जाते हैं . लेकिन कहीं कोई ऐसे देश के कुछ खिलाडी भी हैं जो जीत के जश्न तक को स्वीकार तब तक नहीं करते जब तक उनकी मज़हबी भावनाओं के अनुरूप कार्य न हो रहा हो ..

इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब ब्रिटिश टीम के दो खिलाड़ी जीत की उन तमाम ख़ुशी को किनारे करते हुए अपनी टीम से अलग हो गए क्योकि वहां जो हो रहा था वो उनके मत और मज़हब के हिसाब से ठीक नहीं था . ये घटना उस समय की है जब भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी मैच को मेजबान इंग्लैंड ने 118 रनों के विशाल अंतर से जीत लिया था .. सीरीज में मिली 4 -1 की जीत के बाद अंग्रेजी टीम ने खूब मजे किये। लेकिन सुर्ख़ियों में टीम के दो खिलाड़ी बने हुए हैं जो मुस्लिम समुदाय से हैं और उन्होंने टीम की सामूहीक ख़ुशी से ज्यादा तरजीह अपने मज़हबी भावनाओ को दी ..ट्रॉफी जीतने के बाद इंग्लिश टीम के नौ खिलाड़ियों ने शैम्पेन की धार में खूब मस्ती की। लेकिन ये दो मुस्लिम खिलाड़ी इस मौके पर अपनी टीम से दूरी बना लिए . टीम को मिली इस जीत के बाद प्लेयिंग 11 के नौ खिलाड़ी तो ट्रॉफी के साथ नाच-गा कर खूब मस्ती कर रहे थें, लेकिन दो खिलाड़ी काफी कटे-कटे से दिखें। इन दोनों खिलाड़ियों का नाम था मोईन अली और आदिल रशीद जिन्होंने खुद को जीत के जश्न से दूर इसलिए रखा क्योकि उनके हिसाब से उस जश्न में शराब का प्रयोग हो रहा था जो इस्लाम में हराम है .

यहाँ ये बात गौर करने योग्य है की यह पहला मौक़ा नहीं जब इन दोनों मुस्लिम खिलाड़ियों ने शैम्पेन के साथ होने वाले टीम के सेलिब्रेशन में शरीक होने से मना किया हो। इसके पहले भी कई सीरीज में ऐसा ही देखने को मिला है, जब जीत के बाद इन दोनों मुस्लिम खिलाड़ियों ने ऐसा किया है। मोईन अली से जब एक बार इस बारे में पूछा गया था तो उन्होंने साफ़ बताया था कि उनके मज़हब में शैम्पेन को गलत बताया गया है। इसलिए जब टीम इसके साथ सेलिब्रेट करती है तो अली इस से बचते हैं। लेकिन टीम के लिए और टीम की जीत के साथ मोईन अली हमेशा खड़े हैं। दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम के बल्लेबाज हाशिम अमला ऐसे मौके पर खुद अलग हो जाया करते हैं। रमजान के महीनों में भी मुस्लिम क्रिकेटर सार्वजनिक तौर पर कुछ भी खाने-पीने से परहेज करते है।

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