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क्यों दुष्प्रचार का शिकार बनाये जा रहे हैं लखनऊ के कप्तान कलानिधि नैथानी ? जबकि आंकड़ों का ग्राफ व जनता का रुख कुछ और ही कहता है

उनका कैरियर निष्कलंक रहा है, उन्होंने हमेशा से प्रयास किया कि वो जहां भी रहें वहां सबसे ऊपर कानून का राज हो. उसके नीचे सभी हों, चाहे नेता, अभिनेता, ब्यूरोक्रेट या कोई भी अन्य.. भला कानून को तोड़ने वालों को ये बात रास कैसे आ सकती थी.. शुरू में सोचा कि नया है, इसको मैनेज कर लेंगे .. लेकिन जब सभी प्रयास नाकाम रहे तो आखिरकार शुरू कर दिया पलटवार और ले लिया निशाने पर उस अधिकारी को जिसका पुलिस कैरियर ही नही बल्कि व्यक्तिगत जीवन भी बेदाग रहा है . जी हां, ये बात चल रही है लखनऊ के वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री कलानिधि नैथानी की ..हल्ला बोल अपराधियो पर समाज के हर वर्ग का होना चाहिए जबकि हल्ला बोल पुलिस पर करने की परंपरा न जाने किस ने चलाई ये विचार का विषय है साथ ही बदलाव का भी ..

पिछले कुछ समय से उन्हें मीडिया के एक वर्ग द्वारा सोची समझी रणनीति के तहत निशाना बनाया जा रहा है .. इसमे शब्द भले ही किसी के हों लेकिन दर्द किसी और का ही झलक रहा .. वो दर्द उनके हैं जिनके काले कारनामें बन्द हो गए, वो दर्द उनका है जिनका अवैध कारोबार ठप्प हो गया. वो पीड़ा उनकी है जो खुद को कानून से ऊपर नही समझ पा रहे हैं . आखिरकार उन्होंने offense is best defence का नियम अपनाया और अपने कुछ वफादारों को साथ ले कर हमलावर हो गए कलानिधि नैथानी के ऊपर ..

अगर सिर्फ बढ़ते अपराध, कानून व्यवस्था के आंकड़ो पर ही लखनऊ के SSP को घेरा जा रहा होता तो यकीनन ये बात कहीं न कहीं सैद्धांतिक व तार्किक लग रही होती, लेकिन जब विरोध के स्वरों में “योगी के खास” या “शासन के कृपापात्र” जैसे शब्द जोड़े जाने लगे तो खुद से ही समझने के लिए काफी है कि वो सभी शब्द राजनीति से प्रेरित हैं जो ब्यूरोक्रेसी के दबाव को बर्दाश्त नही कर पा रहे हैं ..असल मे सत्य ये है कि कलानिधि की निष्कलंक छवि को शासन के उच्चाधिकारी पसन्द करते होंगे और शासन के मनमाफिक कार्य करके उनकी पसन्द बनना किस अधिकारी की इच्छा नहीं होती या इसमें बुरा क्या है ? एक शासन भी यही चाहता है कि उसके शासित क्षेत्र में कानून व्यवस्था कायम रहे और अमन चैन का माहौल बना रहे , इसको लागू कर के रखने वाला अधिकारी शासन का ही नही बल्कि जनता का भी स्वतः ही प्रिय हो जाएगा , तो इसमें बुरा क्या है और इस अच्छी उपलब्धि को बुरे शब्दो मे बयान करने की मंशा क्या हो सकती है इसका अनुमान शासन को लगाना है .

अब बात कर ली जाय आंकड़ों की जो अपराध से संबंधित हैं .. लखनऊ में कलानिधि नैथानी के नेतृत्व में 2 घटनाएं मुख्य रूप से राष्ट्रीय खबर बनी थी.. पहली सिपाही प्रशांत द्वारा एप्पल के मैनेजर को गोली मारना व दूसरी एक्सिस बैंक के गार्ड की हत्या कर के लूट.. इन दोनों घटनाओं का समुचित खुलासा व सही समय पर दोषियों की गिरफ्तारी के साथ साथ उचित कार्यवाही की गई ..इन सभी घटनाओं में पीड़ित पक्ष पुलिसिया कार्यवाही से संतुष्ट हुआ लेकिन न जाने के अन्धविरोधियो में असंतुष्टि छाई रही और वो अपना विरोध जारी रखे रहे .. इसके अलावा अगर देखा जा तो लखनऊ के व्यापारी व आम जनता राहत की सांस लेती रही और कोई बड़ा अपराध नही होने दिया गया .. हाँ, कई बड़े अपराधी इस बीच मब दबोचे गये जिसका जिक्र नही किया गया , शायद जानबूझकर …

सबसे बड़ी उपलब्धि पुराने लखनऊ में साम्प्रदायिक तनाव को ले कर रही..पुराने तमाम पुलिस कप्तानों के कार्यकाल में पुराने लखनऊ में कभी शिया – सुन्नी तनाव हुआ तो कभी हिन्दू – मुस्लिम झड़प.. लेकिन श्री कलानिधि नैथानी के कार्यकाल में पुराना लखनऊ अपेक्षाकृत शांत व सौहार्दपूर्ण रहा जिसके लिए यकीनन कलानिधि जी सहारना के पात्र हैं और आशा है कि इन आंकड़ों को शासन भी देख रहा होगा ..लखनऊ का व्यापारी निश्चिंत हो कर आज अपना कारोबार कर रहा व सिर्फ सरकारी टैक्स के अलावा कोई गुण्डाटैक्स आदि की प्रथा समाप्त हो चुकी है ..इसके लिए शासन व प्रशासन प्रशंशा योग्य है …प्रदेश के कई जिलों में पुलिसकर्मियों पर हमले हुए व पुलिस की साख गिरी लेकिन लखनऊ में ऐसा चुस्त प्रशासन नही होने दिया ..

अक्सर कई पुलिस अधिकारियों को एक बड़े तथाकथित नेता के दबाव में टूटते व झुकते देखा गया है लेकिन नेतागीरी, पक्ष विपक्ष के केंद्र लखनऊ राजधानी में कार्य कर रहे SSP श्री कलानिधि जी द्वारा इन सभी मामलो में बनाया गया सामंजस्य व उनकी कुशल कार्यशैली प्रशंसा की पात्र है . आशा है उन्हें मीडिया के एक खास वर्ग के ट्रायल का शिकार शासन द्वारा नही बनाने दिया जाएगा व उनके कार्यों व अपराध के आंकड़ो को देख कर शासन व जनता किसी निष्कर्ष तक पहुचेगी … इन तमाम चर्चाओं का पीछे मकसद चाहे जो भी हो लेकिन आतंक व अपराध से एक साथ जूझती पुलिस के मनोबल पर इस प्रकार से शाब्दिक व राजनैतिक प्रहार किसी भी देश या प्रदेश की सुरक्षा व शांति के लिहाज़ से उचित नही कहे जा सकते हैं ..

 

 

# सहायक सम्पादक – राहुल पांडेय

मोबाइल – 9598805228

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