बड़े-बड़े अपराधियों को धूल चटाया लेकिन अपने ही घर से हार गया IPS… अलविदा सुरेन्द्र दास

जरूरी नहीं इंसान बाहर से जितना खुश दिखता है, अन्दर से भी उतना ही खुश हो या फिर अपनी जिम्मेदारी के प्रति जितना द्रढ़ तथा संकल्पित नजर आता है वही उसकी हकीकत हो. कम से कम हाल ही जहर खाकर आत्महत्या करने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के जांबाज आईपीएस तथा कानपुर के पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र दास की कहानी तो यही कहती है. आईपीएस सुरेन्द्र दास उत्तर प्रदेश पुलिस का वो नाम है जिसके नाम मात्र से अपराधी कांप उठते थे. बड़े-बड़े अपराधियों को आईपीएस सुरेन्द्र दास ने धूल चटाई लेकिन ये जांबाज आईपीएस अपनों से हार गया तथा बाहर से हंसमुख तथा बेहद मजबूत नजर आने वाले आईपीएस सुरेन्द्र दास अपनों के आगे इतने असहाय हो गये कि उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया. सुदर्शन परिवार दिवंगत आईपीएस सुरेन्द्र दास को नम आँखों से अंतिम विदाई देता है.

आइपीएस सुरेंद्र दास की आत्महत्या चौंकाने वाली है. एकेडमी में हर हालात से जूझने की कड़ी ट्रेनिंग लेने वाले शख्स के भी इस कदर टूटकर मौत को गले लगाने से लोग हैरान हैं. पुलिस और परिवार दोनों ने आत्महत्या के पीछे पत्नी से विवाद को मुख्य वजह करार दिया है. फौज में कैप्टन रहे पिता की मौत के बाद भी जो सुरेंद्र दास लक्ष्य से डिगे नहीं और आईपीएस बनकर दिखा दिया, वह सुरेंद्र पत्नी से अनबन के बाद आत्महत्या को गले लगा लेंगे, इसका अंदाजा परिवार को भी नहीं था. बाद 2014 में आइपीएस बने सुरेंद्र दास की पुलिस महकमे में अच्छी छवि के लिए जाने जाते थे. उनकी मौत से उन्हें जानने-वाले हैरान हैं. चाहे बलिया के गांव के दोस्तों की बात करें या फिर उनके मातहत काम करने वाले पुलिसकर्मियों की. हर कोई सुरेंद्र दास के स्वभाग का मुरीद रहा. यह दीगर बात है कि पिछले कुछ समय से सुरेंद्र दास के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ पढ़ीं जा सकतीं थीं. इन हालात ने उन्हें आत्महत्या की तरफ मोड़ दिया. जहर खाने के बाद पांच दिन तक अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष के बाद 10 सितंबर को आईपीएस सुरेन्द्र दास ने रविवार को दम तोड़ दिया.

पांच सितंबर को जब सुरेंद्र ने जहर खाया था तो पुलिस ने सात लाइन का सुसाइड नोट बरामद किया था. लाल रंग की सुर्ख स्याही वाली पेन से यह लेटर लिखा गया था. जिसमें सुरेंद्र ने पत्नी डॉ. रवीना सिंह को आइ लव यू लिखते हुए कहा था कि उनकी मौत के पीछे किसी का हाथ नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी लिखा था कि रोज-रोज की कलह से तंग आकर वह आत्महत्या का फैसला ले रहे हैं. माना जा रहा है कि बीवी को बेहद प्यार करने के बावजूद सुरेंद्र दास रोज-रोज की किचकिच को सहन नहीं कर पाए. सुरेन्द्र दास के बड़े भाई नरेंद्र दास का कहना है कि ‘सुरेंद्र अपनी पत्नी और ससुराल वालों की वजह से तनाव में थे. उनकी शादी के दो महीने बाद ही तलाक की बात शुरू हो गई थी. दोनों की शादी शादी डॉट कॉम के जरिए हुई थी. उनकी पत्नी ना ही मुझसे और ना ही मां से बात करने देती थी तथा उन्हें घर से लगातार दूर करती जा रही थी. नरेंद्र दास ने कहा कि उन्हें ये उम्मीद नही थी कि सुरेन्द्र दास ऐसा कदम उठाएंगे. नरेंद्र ने कहा कि मेरे भाई की मौत के लिए उसकी पत्नी डॉ. रवीना जिम्मेदार है. रवीना, सुरेंद्र को परिवार से अलग करना चाहती थी. सुरेंद्र बहुत भावुक, संवेदनशील और परिवार को साथ लेकर चलने वाला था. बहू ने सुरेंद्र को इतना प्रताड़ित किया कि उसे जान देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं सूझा. वह पत्नी के व्यवहार से पूरी तरह टूट गया था तभी बिना कुछ सोचे समझे अपनी जान दे दी

आईपीएस सुरेन्द्र ने जहर खाने से पहले सुसाइड नोट में लिखा था- मैं जो भी कर रहा हूं, उसका जिम्मेदार मैं खुद हूं. रवीना, मैं झूठा नहीं हूं. मैंने जो रिकॉर्डिंग की थी, वह आपकी मां को ही भेजने के लिए सोचा था, बाद में लगा कि नहीं भेजना चाहिए. कुछ छिपाना होता तो मोबाइल ऐसे ही नहीं छोड़ता. मैं तनावग्रस्त था, इसलिए मुझे आत्महत्या के विचार आ रहे थे. सच यह है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं. मैं षड्यंत्र का शिकार हुआ हूं. तुम चाहो तो उससे (अपने एक कर्मचारी का नाम) भी पूछ सकती हो. मैंने उससे चूहे मारने के लिए सल्फास लाने को बोला है. कुछ दिन पहले ब्लेड भी लाने को कहा था. मैं जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठा रहा हूं. मैंने गूगल पर भी आत्महत्या के तरीके सर्च किए. आई लव यू! मेरे इस फैसले के लिए मुझे माफ करना. एसएसपी अनंत कुमार तिवारी ने बताया कि सुसाइड नोट में पारिवारिक कलह, पत्नी डॉ. रवीना से छोटी-छोटी बातों पर झगड़े का जिक्र है. इसके बाद सुरेन्द्र में जहर खा लिया तथा अब सुरेन्द्र इस दुनिया में नहीं है. अलविदा सुरेन्द्र

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