शिक्षकों पर SCST का मुकदमा सिर्फ इसलिए दर्ज करवा दिया क्योंकि उन्होंने बचानी चाही एक छात्रा की इज्जत

SCST एक्ट का किस कदर दुरूपयोग हो सकता है तथा आखिर क्यों देश का सवर्ण तथा ओबीसी समाज इस एक्ट के खिलाफ सड़कों पर है इसकी बानगी उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में देखने को मिली है जहाँ एक अन्तर कॉलेज के छात्र ने स्कूल के शिक्षकों के खिलाफ SCST एक्ट में मुकदमा दर्ज करा दिया. शिक्षकों की गलती सिर्फ इतनी थी कि छात्र स्कूल की छात्राओं के साथ अभद्रता कर रहा था तथा इसके लिए शिक्षकों ने उसको रोका तो छात्र नाराज हो गया तथा SCST एक्ट में शिकायत लिखवा दी. मामला जिले के कोपागंज थाना क्षेत्र के बापू इंटर कालेज का है.

बतादें कि बीते 6 सितंबर को स्कूल में ही एक छात्र को शिक्षकों ने लड़की का वीडियो बनाते देख लिया. इस मामले को लेकर विरोध शुरू हो गया. मामला सूचना प्रधानाचार्य़ को दी गई. आरोपी छात्र को बुलवाने के लिए प्रिंसिपल ने दो शिक्षकों को भेजा, लेकिन वीडियो बनाने वाले आरोपी छात्र ने शिक्षकों से लड़ाई कर लिया. शिक्षकों का आरोप है कि छात्र उनके साथ हाथापाई करने लगा जबकि हम बस इतना ही समझाते रहे कि आगे से लड़कियों के साथ किसी तरह की अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जायेगी. नाराज छात्र वहां से निकलकर कोपागंज थाने चला गया तथा विद्यालय के दो शिक्षक कर्मचारियों के खिलाफ उसके साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज करा दिया. जब इस बात की जानकारी प्रशासन को हुई तो खलबली मच गई. इसके बाद स्कूल प्रशासन की तरफ से भी छात्र के खिलाफ मारपीट की तहरीर दी गई.

विद्यालय के कर्मचारी वीरेंद्र ने बताया कि लंच का समय था. आरोपी छात्र लड़कियों के कमरे में घुस गया और वीडियो बनाने लगा. छात्राओं ने इस बात की जानकारी विद्यालय प्रशासन को दी. प्रिंसिपल साहब हमको और हमारे सहयोगी को बुलाएं और प्रकरण की जानकारी करने के लिए हमें वहां भेजें. वहां पर जाकर जब हम लोगों ने लड़के से पूछताछ की तो वह हम लोगों के साथ बदतमीजी करने लगा तथा हम लोगों के पकड़ने पर वह मारपीट करने लगा. बाद में यहां आकर उसने माफी माँगी. उसके बाद प्रिंसिपल साहब ने उसको छोड़ दिया. लेकिन दूसरे दिन थाने में जाकर हम लोगों के खिलाफ एफआईआर कर दिया. हम चाहते हैं कि विद्यालय का वातावरण शांतिपूर्ण रहें और बच्चियां सुरक्षित होकर यहां पढ़ाई करें लेकिन जिस तरह से हमारे खिलाफ SCST एक्ट में शिकायत कराई गयी है वः बहुत हेई गलत है तथा इस तरह से हम गलत कार्य का विरोध ही नहीं कर पायेंगे.

विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने इस बात की जानकारी शिक्षक संघ को दी. सोमवार को विद्यालय में शिक्षक संघ के नेताओं की बैठक हुई जिसमें फैसला लिया गया कि अगर पुलिस प्रशासन ने मामले में बिना सही तथ्य़ जाने किसी तरह की कार्रवाई की तो हमें प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ेगा. शिक्षक नेताओं का इनका कहना है कि अब शिक्षकों के खिलाफ दर्ज कराये गये मामले पर प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर 12 सितंबर तक मुकदमा वापस न लिया गया तो हम आंदोलन के लिए मजबूर होंगे. वहीं SCST एक्ट में आरोपी बनाये गये शिक्षकों का कहना है कि आरोपी ने गलती भी किया और हमारे ऊपर मुकदमा भी लगा आखिर ये कैसा कानून है

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