मुन्ना बजरंगी के ऊपर जिस बसपा नेता ने कभी दर्ज करवाया था मुकदमा,, उसका ये हाल कर दिया बसपा ने.. मुन्ना की मौत के बाद

दुर्दांत अपराधी मुख्तार अंसारी के गुर्गे तथा दशकों लोगों के बीच खौफ का पर्याय रहे मुन्ना बजरंगी की ह्त्या के बाद मायावती की बहुजन समाज पार्टी में भी हलचल मच गई है. इधर मुन्ना बजरंगी मारा गया तो उफर बसपा ने अपने एक नेता को पार्टी से निष्काषित कर दिया. बताया गया है कि बसपा द्वारा निष्काषित किये गए इस नेता ने माफिया मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मामला दर्ज कराया हुआ था. मुन्ना बजरंगी की  ह्त्या के तुरंत बाद उस पर मुकदमे के वादी नेता का बसपा से निष्कासन अपने आप में सवाल खड़े करता है.

आपको बता दें कि माफिया मुन्ना बजरंगी के खिलाफ रंगदारी मांगने के विरोध में कानूनी लड़ाई लड़ रहे बसपा से निष्काषित नेता लोकेश दीक्षित हैं जो पूर्व विधायक भी रह चुके हैं. लोकेश दीखित के निष्काशन का फैसला मुन्ना बजरंगी की ह्त्या के तुरंत बाद लिया गया. हालांकि बसपा ने मामले को पार्टी विरोधी गतिविधि बताया है. उधर, दीक्षित ने कहा प्रत्येक माह होने वाली उगाही का उन्होंने विरोध किया और रुपये देने से मना कर दिया था. बड़ौत सीट से बसपा के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित ने सितंबर 2017 में मोबाइल पर रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस की जांच में सुल्तान और मुन्ना बजरंगी के नाम सामने आए. तभी से लोकेश दीक्षित कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी मामले में बजरंगी को बागपत जेल लाया, लेकिन कोर्ट में पेशी से पहले ही बजरंगी की हत्या हो गई. दीक्षित ने भी जान का खतरा बताया था. यह पूरा प्रकरण चल ही रहा था कि इस बीच बसपा की सियासत में नया मोड़ आ गया है.

मेरठ और सहारनपुर मंडल के मुख्य जोन इंचार्ज सत्यपाल पेपला ने बताया कि पार्टी सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते लोकेश दीक्षित को बसपा से निष्कासित कर दिया गया है. उधर, लोकेश दीक्षित का कहना है कि पार्टी की प्रत्येक माह होने वाली मीटिंग में पार्टी फंड के नाम पर लाखों रुपये विधानसभा वार जमा कराए जाते हैं. पिछले तीन माह से उन्होंने रुपये देने बंद कर दिए थे और इसका विरोध किया. इसी वजह से उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है.

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