समाजवादी पार्टी की लैपटॉप योजना का ऐसा सच जो अखिलेश के लिए किसी भी हाल में शुभ समाचार नहीं

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अभी तक अपनी सरकार की लैपटॉप वितरण योजना का बखान करते हुए नहीं थकते हैं. अखिलेश सरकार की ऐसी लैपटॉप योजना का एक ऐसा सच सामने आया है जिससे अखिलेश यादव की कथित ईमानदारी तथा नैतिकता को कटघरे में खडा कर देगा.

खबर के मुताबिक़, अखिलेश यादव की लैपटॉप वितरण योजना में एक बहुत बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. खुलासे के मुताबिक़, इस लैपटॉप योजना के तहत आए करीब 15 लाख लैपटॉप में से करीब 8 लाख 70 हजार लैपटॉप का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है. इनकी कीमत करीब 1173 करोड़ रुपए बताई जा रही है. लैपटॉप योजना में हुए इस घोटाले का खुलासा एक RTI के द्वारा हुआ है. आपको बता दें कि लेखक शांतनु गुप्ता की किताब “उत्तर प्रदेश-विकास की प्रतीक्षा में” को लिखने के लिए 2016 में एक आरटीआई फाइल की गई थी.

मीडिया सूत्रों के मुताबिक़, शांतनु बताते हैं कि आरटीआई के मुताबिक 2012 से 2014 तक सपा सरकार ने 14 लाख 81 हजार 118 लैपटॉप खरीदकर प्रदेश के जिलों में भेजे. इनमें से बच्चों को सिर्फ 6 लाख 11 हजार 794 लैपटॉप बांटे गए. बाकी बचे 8 लाख 69 हजार 324 लैपटॉप कहां गए इसकी सरकारी रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं मिली है. इसमें एक समाजवादी लैपटॉप की कीमत 13490 बताई गई है. इसके हिसाब से करीब 1173 करोड़ रुपए कीमत के लैपटॉप गायब हैं.

ये है हकीकत–

आगरा जिले में 38615 लैपटॉप भेजे गए, 16638 बांटे गए.

अलीगढ़ में 20293 लैपटॉप भेजे गए, 1224 लैपटॉप बांटे गए.

इलाहबाद में 69395 लैपटॉप मंगाए गए, 20341 बांटे गए.

अम्बेडकर नगर में 40177 लैपटॉप मंगाए गए, 7218 बांटे गए.

अमेठी में 13165 लैपटॉप पहुंचे, 3820 बांटे गए.

बहराइच में 15782 लैपटॉप मंगाए गए, इनमें से सिर्फ 4398 बांटे गए

इसी तरह लगभग हर जिले में लैपटॉप वितरण में हुए घोटाले की खबर सामने आई है, जिसके बाद अखिलेश यादव एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गये हैं.

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