आप पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद दिल्ली में तेजी से बढ़े पुलिसकर्मियों की आत्महत्या के मामले. “ठुल्ला” जैसे अपमानजनक शब्द व हर दिन नए लांछन. एक और ACP ने त्यागे प्राण

वो समय से ज्यादा ड्यूटी देते हैं, एक ही वर्दी में दिन व रात बिता दिया करते हैं. आतंकियों व अपराधियो दोनों से एक साथ लड़ते हैं .  इसके साथ बैंक फ्राड आदि मामले , घर के आपसी झगड़े आदि सभी मामलों का जिम्मा उन पर होता है .. लेकिन जब बटला हाउस के आतंकियों का महिमामंडन होने लगे और उसी मुठभेड में अमरता को प्राप्त करने वाले पुलिस अधिकारी के बलिदान पर सवाल उठाए जाने लगे तो उनके मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ना स्वाभाविक है ..पीड़ा दोगुनी हो जाती है तब जब ये मनोबल किसी विदेशी या आतंकी समूह से नही बल्कि संवैधानिक रूप से चुने गए लोग तोड़ रहे हों .. वर्तमान समय मे दिल्ली की जनता ही नहीं बल्कि दिल्ली की पुलिस भी इसी पीड़ा से गुज़र रही है जिसके कई अधिकारी व जवान एक के बाद एक कर के आत्महत्या करते जा रहे हैं ..

निश्चित तौर पर एक पुलिस वाला वर्दी के अंदर एक इंसान होता है .. उसके पीछे उसका परिवार , व्यक्तिगत जिम्मेदारियां आदि तमाम विषय होते हैं जो अक्सर उसके लिए मानसिक पीड़ा का कारण बनते हैं .. लेकिन उसी समय उसको अपने विभाग से भी भयानक दबाव झेलना पड़ता है जो उस वर्दी वाले पर दोहरी मार जैसा साबित होता है .. लेकिन वो जवान जैसे तैसे दोनों हालातों में सामंजस्य बनाने की कोशिश करता है .. लेकिन ठीक इसी मौके पर जब उसके खिलाफ तीसरा मोर्चा खोल दिया जाता है तब उसका जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है .. ये तीसरा मोर्चा है आतंकियों , नक्सलियों की पैरवी व महिमामण्डित करते लेकिन वर्दी वालों को ठुल्ला , किसी पार्टी का एजेंट बोलते कुछ ऐसे लोग जो अपनी गलतियों को भी पुलिस वालों पर थोपने की कोशिश करते हैं ..

अभी हाल में ही खुद पर फेंकी मिर्च को राष्ट्रीय आपदा बताते हुए प्रथम दृष्टया भी दोषी पुलिस को ठहराया गया, मानवाधिकार, मैनुअल की तमाम बेड़ियों में जकड़ा कुछ पुलिसवाले इस खुले तीसरे मोर्चे के आगे घुटने टेक दिया करते हैं और लगा लेते हैं मौत को गले ..पिछले कुछ समय से दिल्ली में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या जिस अनुपात में बढ़ी है उस से इतना जरूर लग रहा है कि कोई तो है जिसकी नीतियां समाज के रक्षको पर इतनी भारी पड़ रही हैं कि उन्हें उस से निकलने का रास्ता सिर्फ मौत ही दिख रही है .. नया मामला ACP की आत्महत्या से जुड़ा है जो दिल्ली पुलिस के जांबाज़ों में गिने जाते थे ..थोड़े से वेतन में दिन रात जाग कर समाज के लिए धूल धूप , गर्मी ठंडी में खड़े रहने वाले इन जवानों को राजनीति का हथियार बना लेना और खुद के हवाले करने की मांग करने वालों की मंशा भले ही कुछ भी हो लेकिन ये भारत की राजधानी की सुरक्षा के लिए किसी भी हाल में सही नहीं माना जा सकता है..

फिलहाल बात करते हैं ACP के खुदकुशी की.भारत की राजधानी दिल्‍ली से चौंकाने वाली खबर सामने आई हैं। यहां एसीपी रैंक के एक अधिकारी ने कथित तौर पर आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय की बिल्डिंग से कूदकर खुदकुशी कर ली। उनकी पहचान 55 वर्षीय प्रेम वल्‍लभ के रूप में की गई है। फिलहाल यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि उन्‍होंने किस वजह से यह अतिवादी कदम उठाया। बताया जा रहा है कि एससीपी प्रेम वल्‍लभ सुबह करीब 9.30 बजे दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे और आधे घंटे के भीतर करीब 10 बजे उन्होंने कथित तौर पर बिल्डिंग की 10वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी।

इस घटना के बाद पुलिस महकमा भी हैरान है। उनका शव पुलिस मुख्‍यालय के प्रवेश द्वार के पास पोर्च में मिला शुरुआती जांच से यह खुदकुशी का मामला प्रतीत होता है। हालांकि फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्‍होंने किस वजह से यह कदम उठाया। दिल्‍ली पुलिस की क्राइम और ट्रैफिक यूनिट के साथ काम कर चुके बल्‍लभ को 2016 में उनकी बेहतरीन सेवा के लिए पुलिस मेडल भी प्रदान किया गया था। फिलहाल मामले में विस्‍तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।

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