Breaking News:

योगीराज के अम्बेडकरनगर में पुलिस प्रताड़ना से कराह रहा BJP विधायक का परिवार तो DM डांट के बाद नक्सलियों से लड़ कर बलिदान हुए जवान के परिवार द्वारा समाधि का एलान

यदि निचले स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में कहीं आक्रोश पनपने का कारण देखा जाय तो यकीनन उसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में देखा जा सकता है. यहाँ पर अपने पति और भतीजे के प्राण गंवा कर भाजपा के लिए संसद और विधायक की सीट पहली बार निकलवा कर चर्चा में आये रामबाबू गुप्ता का परिवार जहाँ अम्बेडकरनगर पुलिस के प्रताड़ना से कराह रहा है तो वहीँ वहां के जिलाधिकारी पर आरोप लगा है नक्सलियों से लड़ कर वीरगति पाए एक जवान के परिवार के साथ अभद्रता कर के उनको भगा देने का .

अम्बेडकरनगर गवाह है कि एक क्षेत्र में सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के खुद के पदाधिकारियों तो दूर जनप्रतिनिधियो की हैसियत का उनकी ही सरकार में . यहाँ पर जहाँ टांडा भाजपा विधायक संजू देवी का परिवार एकतरफा कानूनी कायर्वाही का शिकार बन रहा है, मुस्लिम आबादी से घिरे हिन्दूवादी विचारधारा के उस परिवार को सुरक्षा देने के बजाय उनके शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर के उनके ही घर वालों पर जेल जाने की तलवार लटका दी गयी है . दोतरफा FIR होने के बाद भी दूसरी तरफ के लोगों को गिरफ्तारी के बजाय पुलिस सुरक्षा दे दी गयी और उनके मामले में स्थानीय सांसद तक सब जान कर भी मात्र मूकदर्शक की भूमिका में बैठे हैं तो वहीँ अब एक और शर्मनाक वाकया सामने आया है जो स्थानीय प्रशासन के खिलाफ किसी में भी आक्रोश भर देने के लिए काफी है .

यहाँ पर देश के लिए अपनी जवानी और उसी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर बलिदानियों के परिजन अब प्रशासन से प्रताड़ना पा रहे हैं . हद तो तब हुई जब प्रशासन से उपेक्षित और लोगों से प्रताड़ित बलिदानी के इस परिवार ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छामृत्यु मांगी है। इतना ही नहीं, उसने 12 जनवरी, 2019 को समाधि लेने की तारीख भी मुकर्रर कर दी है। राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा है कि यदि 11 जनवरी 2019 तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह 12 जनवरी को अपने शहीद बेटे के समाधि स्थल पर ही समाधि ले लेगा।

अंबेडकरनगर जिले के थाना सम्मनपुर क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर तुलसीपुर निवासी सुरेशमन विश्वकर्मा का पुत्र बजरंगी विश्वकर्मा सीमा सुरक्षा बल की 101वीं बटालियन में तैनात था, 6 अगस्त, 2010 को त्रिपुरा के नलकटा में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में वह शहीद हो गया। शहीद बजरंगी विश्वकर्मा के अदम्य साहस को यादगार बनाने के लिए सीमा सुरक्षा बल की 101वीं बटालियन की बीओपी रतियापारा फारवर्ड का नाम ‘बजरंगी’ स्वीकृत कर बजरंगी विश्वकर्मा का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित कर दिया गया। बजरंगी विश्वकर्मा को वीरता के लिए मरणोपरांत ‘राष्ट्रपति वीरता मेडल’ प्रदान किया गया था। यह मेडल तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने 30 नवंबर, 2011 को दिया था।

बलिदानी के पिता के अनुसार, वर्तमान जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, एसडीएम अकबरपुर, तहसीलदार अकबरपुर और थाना सम्मनपुर का रवैया उनके बेटे की शहादत पर पानी फेर रहा है। सुरेशमन विश्वकर्मा ने बताया कि जिस समय उनके बलिदानी बेटे का पार्थिव शरीर गांव लाया गया था, तत्कालीन जिलाधिकारी ने बलिदानी के नाम से स्मारक बनाने तथा परिजनों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की बात कही थी। स्मारक के लिए जमीन चिन्हित करके शहीद परिवार को बता दी गई, जिस पर शहीद परिवार ने निजी श्रोत से स्मारक बनवाया है। लेकिन परिजनों के लिए जमीन नहीं उपलब्ध कराई गई और न ही राज्य सरकार से कोई सहायता व सुविधा प्रदान की गई। परिजन डीएम से लेकर सीएम व पीएम तक गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।

यहां तक कि मौजूदा भाजपा सांसद हरिओम पांडेय और भाजपा विधायक गोरख बाबा ने भी शहीद परिवार की सहायता के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा, लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात। इन्हीं प्रयासों के बीच भाजपा सांसद हरिओम की एक कोशिश से थोड़ी उम्मीद जगी और शहीद की पत्नी के नाम 30 जून, 2018 को पांच बिस्वा जमीन का पट्टा किया गया, मगर पट्टे से संबंधित कागजात अभी तक परिजन को नहीं दिया गया। पट्टा करने में तहसील प्रशासन ने गजब का खेल भी किया है। जिस जमीन पर शहीद के परिजनों का पुश्तैनी मकान है उसे ही पट्टे की जमीन बता दिया गया है और बगल की बंजर पड़ी जमीन पर पैसा लेकर गांव के एक व्यक्ति का कब्जा करा दिया गया है। वह व्यक्ति आये दिन बलिदानी के परिजनों को परेशान कर रहा है। यहाँ तक कि वो ये तक कहना बताया जा रहा है कि जहाँ तेरा बेटा गया है वही तुझ को भी भेज देंगे .

शिकायत करने पर लेखपाल से लेकर डीएम तक ठीक से बात नहीं करते। अलबत्ता मीडिया रिपोर्ट से आ रही खबरों के अनुसार डीएम पर आरोप है कि ने स्वयं बलिदानी के परिजनों के प्रति अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया। इन्हीं सब बातों से आहत और कुछ मांगों को लेकर बलिदानी के पिता सुरेशमन विश्वकर्मा ने राष्ट्रपति को प्रार्थना पत्र भेजकर 11 जनवरी, 2019 तक समस्या का निस्तारण किए जाने की मांग की है। पत्र में यह भी लिखा है कि यदि तय समय पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 12 जनवरी, 2019 को अपने शहीद बेटे के स्मारक स्थल पर ही समाधि ले लेंगे।

Share This Post