गाय काट कर खाने की जिद करने वालों को मानवीय जवाब.. एक मगरमच्छ के अंतिम संस्कार में जुटे 500 लोग और दी अंतिम विदाई.. ये है हिन्दू और हिंदुत्व

ये वही छत्तीसगढ़ है जहां के कुछ मामलो को तूल देते हुए संसद तक हल्ला मचाया गया और आखिरकार एक नए शब्द का निर्माण किया गया था जिसको नाम दिया गया था “मॉब लिंचिंग” का ..इस से पहले शायद ही किसी ने ये शब्द जाना या सुना रहा होगा.. इसकी कुछ शर्तें भी निर्धारित कर दी गयी थीं .. उदाहरण के लिए इसमे शिकार होने वाला वर्ग विशेष से ही होना चाहिए, बीच मे गौ माता का भी होना जरूरी है..इसके साथ साथ भीड़ में भगवा वस्त्र पहने या तिलक लगाएं लोग भी होने चाहिए..तब जा कर कुछ साजिशकर्ताओं के इस स्वरचित शब्द का निर्माण पूरा होता..पर हिन्दू और हिंदुत्व क्या है इसको देख रहा है राष्ट्र और चरितार्थ हो रही शास्त्रों में आदेशित जीव पर दया करो का निर्देश ..

ज्ञात हो कि गौ मांस को जबरन काट कर खाने की जिद पर आमादा कुछ कट्टरपंथियों को, गौ मांस के साथ सेल्फी भेजते कुछ तथाकथित इतिहासकारों को और गौ रक्षा के नाम पर पुरष्कार लौटाते कुछ स्वघोषित बुद्धिजीवियों को हिन्दू और हिंदुत्व का असली परिचय करवाया गया है छत्तीसगढ़ से..ये घटना गत मंगलवार सुबह की है ..यहां के जिला बेमेतरा के बावमोहतरा गांव में लगभग 500 लोग जमा हुए थे.. सब शोकाकुल लग रहे थे और सबके चेहरे पर दुख था.. जब इसका कारण जाना गया तो सभी भावविह्वल हो गए ..असल मे वो सभी वहां पर जमा हुए थे एक मगरमच्छ के अंतिम संस्कार के लिए जो उनके साथ बहुत लंबे समय तक था ..

लगभग 3 मीटर लंबे इस मगरमच्छ का नाम गांव वालों ने गंगाराम रख दिया था. मगरमच्छ गंगाराम लगभग 130 वर्ष से उसी क्षेत्र में जल में रहता था जो वहां की कई पीढ़ियों से परिचित था.. वो बच्चो के साथ नदी में तैरता भी था और किसी को नुकसान भी नही पहुचता था. गांव वाले 130 वर्षों से उसको खाना आदि दे दिया करते थे.. इसी के चलते उनका अंतिम संस्कार पूरे हिन्दू रीति रिवाजों के साथ किया गया ..वन विभाग के अधिकारी RK सिन्हा ने बताया कि मगरमच्छ की मृत्यु के बाद पूरे गांव के लोग उसके पोस्टमार्टम में मौजूद रहे और आखिर में उसका शव खुद को सौंपने की मांग की थी जिसका वन विभाग की देखरेख में हिन्दू रीति रिवाजों से अंतिम संस्कार हुआ..

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