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हिन्दुओं से भाईचारे की बात करके वोट लेने वाले वसुंधरा सरकार के कद्दावर मंत्री युनुस खान ने अपने सरकारी बंगले में मौजूद महादेव शिव के मंदिर व मूर्ति का किया था ये हाल

हिंदुस्तान की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता के मायने क्या होते हैं, ये राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी की वसुंधरा राजे सरकार के कद्दावर मंत्री यूनुस खान ने दिखाए. यूनुस खान ने तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की बातें की, हिन्दू मुस्लिम एकता के नारे लगाए तथा वादे किये कि वह धर्म या मजहब के आधार पर कभी राज्य की जनता के साथ भेदभाव नहीं करेगा, कभी गैर मजहबी आस्थाओं का अपमान नहीं करेगा। लेकिन ये सिर्फ राजनैतिक नारा था तथा हिन्दुओं के वोट पाने का छलावा था.

यूनुस खान की हकीकत आई जब राजस्थान की जनता ने उसे भारी मतों से जिताकर विधायक बनाया तथा विधानसभा भेजा तथा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उसे अपनी कैबिनेट में शामिल किया। मंत्री बनने के बाद यूनुस खान को जो बँगला मिला था, उस बंगले में बने शिव मंदिर को वसुंधरा राजे के खासमखास मंत्री यूनुस खान ने हटवा दिया। मंत्री यूनुस खान अपने सरकारी बँगले तक मैं शिव मंदिर को बर्दाश्त नहीं कर पाया तथा उसने बंगले से मंदिर को हटवा दिया. यूनुस खान ने शिव मंदिर को बंगले से हटवाकर सड़क पर शिफ़ करवा दिया था.

यहां सवाल मंदिर को हटाने या नहीं स्थापित करने का नहीं है बल्कि मंत्री यूनुस खान की मानसिकता का है. धर्मनिरपेक्षता की बाटन करने वाले मंत्री यूनुस खान की मानसिकता क्या है, वह इस प्रकरण से साफ़ साफ़ समझा जा सकता है. जो मंत्री अपने सरकारी बंगले में हिन्दुओं के आराध्य भगवान शिव के मंदिर को बर्दाश्त नहीं कर सकता, हिन्दुओं के प्रति उसकी मानस्किता क्या होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. यूनुस खान की ये सोच तथा उसका शिव मंदिर को हटाने का कार्य एक आइना है उन तथाकथित बुद्धिजीवियों को जो छद्म धर्म निरपेक्षता के नारे लगाते हैं. जो लोग गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मोदी जी के मुस्लिम टोपी न पहनने को अभी तक सांप्रदायिक बताते हैं, वह यूनुस खान के शिव मंदिर हटाने पर मौन साध लेते हैं.

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