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SCST एक्ट का इससे बड़ा दुरूपयोग शायद ही किसी ने देखा या सुना हो.. जिसमें माँ ने मार डाल डाला अपने ही बेटे को

SCST के खिलाफ देश की जनता क्यों सड़कों पर है तथा क्यों इस एक्ट को खत्म करने या संशोधित करने की मांग कर रही है इसका बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से सामने आया है. SCST एक्ट के दुरूपयोग का ऐसा मामला आपने देखना तो दूर शायद ही कभी सुना होगा. मथुरा में एक महिला ने आपने मासूम बेटे की ह्त्या कर दी तथा इसका आरोप ब्राह्मण परिवार पर लगाकर उन्हें SCST में जेल भिजवा दिया तथा इसके मुआवजे के तौर पर 4 लाख रूपये की पहली क़िस्त भी ले ली. जांच के दौरान पुलिस को हत्याकांड के पिछे एक कहानी नजर आई. दोबारा जांच के बाद पुलिस ने खुलासा किया कि गलत लोगों को जान बूझकर मुआवजे के खातिर फंसाया गया था. इस मामले में अब एससी-एसटी आयोग ने संज्ञान मथुरा के SSP को निर्देश दिया है कि जिन लोगों ने मामला दर्ज किया है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए.

मामले का खुलासा करने के बाद पुलिस ने जांच के बाद बताया कि प्रिंस की हत्या उसकी मां ने ही कर दी थी. दरअसल मासूम को अपनी मां और चाचा के अवैध रिश्तों का पता चल गया था. अनुसूचित जाति का होने की वजह से बेटे की हत्या के मुआवजे के तौर वह साढ़े आठ लाख रूपये भी लेना चाहती थी और इसकी पहली किस्त भी ले चुकी थी. महिला इससे पहले अपने पति की हत्या होने पर सरकार से SCST एक्ट के तहत साढ़े 8 लाख रूपये मुआवजा पा चुकी थी. लेकिन इस बार महिला ने अपने प्रेमी देवर के साथ मिलकर आपने बेटे प्रिंस की हत्या कर दी तथा इसका आरोप ब्राह्मण परिवार के 6 लोगों पर लगाकर उन्हें जेल भिजवा दिया. इसके अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली सहायता के लिए आवेदन कर पहली किस्त के रूप में चार लाख रुपए भी सरकार से हासिल कर लिए थे.

एसपी देहात आदित्य कुमार शुक्ला ने गुरुवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि जब जांच में सभी आरोपी निर्दोष साबित होते दिखे तो नादान बालक की इरादतन हत्या की पहेली को सुलझाने के लिए नए सिरे से जांच कराई गई. तब शक की सुई देवर-भाभी की ओर मुड़ने लगी. जिसे मोबाइल सर्विलांस ने भी काफी पुष्ट कर दिया. उन्होंने बताया, ”उनसे सख्ती से पूछताछ की गई तो पूरी कहानी समझ में आ गई. मामले बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि, इसी वर्ष पिता को खो चुके बच्चे की मां ने उसे केवल इसलिए मार दिया, क्योंकि वह उसके और चाचा के बीच के संबंधों का राज जान गया था.”  एसपी ने बताया, ”नौहझील क्षेत्र के भैरई गांव में 19 जुलाई को अनुसूचित जाति के परिवार के छह वर्षीय पुत्र प्रिंस का शव गांव के कुएं में पड़ा मिला. उसकी मां गुड्डी ने गांव के आधा दर्जन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. जिसके चलते पुलिस ने 21 अगस्त को एक नामजद आरोपी बच्चू को पकड़कर जेल भेज दिया था.”

एसपी ने बताया कि इस मामले की जांच में पुलिस को आरोप सही नहीं मिले. गांव वाले भी पुलिस की थ्योरी को तस्दीक कर रहे थे. गांव में हुई महापंचायत में पुलिस से दोबारा भली प्रकार से जांच कराए जाने की मांग की गई. तब, गहन विवेचना के पश्चात गुड्डी और उसका देवर आकाश ही दोषी निकले. हत्या की साजिश एवं सरकारी रुपया दिलाने में भागीदार राजाबाबू आजाद अभी पुलिस की पकड़ से दूर है. उसकी तलाश जारी है. इस घटना से छह माह पूर्व गुड्डी के पति सुभाष की गांव के ही कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी. जिसमें मुकेश पंडित को नामजद किया गया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उस समय उसे सहायता राशि के रूप में साढ़े आठ लाख रुपए मिले थे. इस बार भी बेटे की हत्या होने पर सवा चार लाख की रकम पा चुकी थी और बाकी रकम मिलने का इंतजार कर रही थी लेकिन इससे पहले ही वह एक्सपोज हो गयी.

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