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बुलंदशहर हिंसा! एकतरफ नमाज के लिए खोल दिया था पवित्र शिव मंदिर तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में काटी गईं थी गाय

उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर 3 की सुबह तक बिल्कुल शांत था तथा सद्भाव की नई मिशाल पेश कर रहा था. बुलंदशहर में चल रहे इस्लामिक कार्यक्रम “तब्लीगी इज्तिमा’ में उमड़ी भारी भीड़ के कारण लोग जाम में फंस गए तो वहां के लोगों ने पवित्र शिव मंदिर के दरवाजे नमाज पढ़ने के लिए खोल दिये. इससे बड़ी साम्प्रदायिक सद्भाव की मिशाल और क्या हो सकती है. यहीं पर सवाल खड़ा होता है कि फिर ऐसा क्या हुआ कि दर्जनों की संख्या में गायों के काटने की खबर आई तथा शांति और सद्भाव दिखा रहा बुलंदशहर सुलग उठा और एक युवक सुमित तथा इंस्पेक्टर सुबोध की जान चली गई..!!

यहां सवाल ये उठता है कि जब एकतरफ नमाज के लिए शिव मंदिर के दरवाजे खोल दिये गए थे, सामाजिक एकता का संदेश दिया गया था तब दूसरी तरफ वो कौन लोग थे जिन्होंने बड़ी संख्या में गोवंशों को काटा? ये कौन लोग थे जो सामाजिक सद्भाव, एकता, प्यार को बर्दाश्त नहीं कर सके तथा गोकशी की. ये कौन लोग थे जो ये स्वीकार नहीं कर सके कि मंदिर में नमाज अदा करवाकर सामाजिक सद्भाव बढ़ेगा, हिन्दू-मुस्लिम एकता बढ़ेगी. इसके बाद इन लोगों ने दर्जनों की संख्या में गोवंशों को काट डाला. गोकशी की सूचना मिलने पर हिन्दू समाज आक्रोशित हो उठा और इसके बाद क्या हुआ वो सबने देखा है. हमने इंस्पेक्टर सुबोध की पत्नी की दर्दनाक चीखें भी सुनी हैं तो वहीं बेटे की मौत के गम में बदहवास सुमित के माता-पिता का दर्द भी देखा है..!!

सवाल ये भी खड़ा होता है कि मंदिर में नमाज पढ़वाकर जिस सामाजिक एकता का प्रयास किया गया था उसको खंडित करने वाले लोग कौन थे? आखिर देश को बांटने वाले ये गद्दार कौन है जो समाज में पनपते प्यार को नहीं देख सकते? कुछ लोग हिन्दू संगठनों को गाली दे रहे हैं तो कुछ पुलिस को लेकिन इसकी #जड़ में जाने की कोशिश कोई क्यों नहीं कर रहा है?? सोचिये कि अगर उन्मादियों द्वारा गोवंशों को नहीं काटा गया होता तो न तो बुलंदशहर सुलगता, न सुमित की मौत होती तथा न इंस्पेक्टर सुबोध की जान जाती. बुलंदशहर विवाद की जड़ तो वो लोग हैं जिन्होंने दर्जन भर से ज्यादा गोवंशों को काटा. लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में कोई भी सुलगते बुलंदशहर की जड़ को न तो जान रहा है और न जानना चाह रहा है.

हमें ये समझना होगा कि हिंदुस्तान के दुश्मन हिंदुस्तान में ही छिपे बैठे हैं जो कभी नहीं चाहते कि हिंदुस्तान आगे बढ़े तथा वही लोग बुलंदशहर में गोकशी को अंजाम देते हैं और उनकी नापाक साजिश का शिकार होकर सुमित तथा इंस्पेक्टर सुबोध अपनी जान गंवा देते हैं” अंत में यही कहूंगा कि “प्रभु श्रीराम, गौमाता मृतक सुमित तथा इंस्पेक्टर सुबोध की आत्मा को शांति दे, उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दे, इनके परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति दे”

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