किसान के नाम पर बनी कमलनाथ सरकार के खिलाफ पहला अलार्म खुद वहां के IAS अधिकारियों ने बजाया.. यूरिया की किल्लत से हालात बिगड़ने की चेतावनी दी, बंदूकों के साए में बिक रही है खाद

किसानों के हित के लिए किये तमाम वादों पर सत्ता में आई कमलनाथ सरकार के खिलाफ पहला अलार्म खुद वहां के कलेक्टरों ने बजाया है. किसान हितैषी बनने का दावा करने वाली कमलनाथ सरकार की कलई खुलती हुई नजर आ रही है. खबर के मुताबिक़, मध्य प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों यूरिया का संकट पैदा हो गया है. स्थिति ये हो गई है कि कलेक्टरों द्वारा पुलिस अधीक्षक की मदद से ‘संगीनों के साये” में यूरिया वितरण कराया जा रहा है. लगभग एक दर्जन जिलों के कलेक्टरों ने पत्र लिखकर सरकार से कहा है कि जल्दी ही यूरिया की व्यवस्था कराई जाए, अन्यथा कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो सकती है.

कलेक्टरों ने यह भी चेताया है कि भारतीय किसान संघ यूरिया की कमी के खिलाफ आंदोलन भी कर सकता है. इसके बारे में मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी सूचित कर दिया गया है. जिन जिलों के कलेक्टरों ने स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई है वो इस प्रकार है

होशंगाबाद– कलेक्टर ने 27 हजार मीट्रिक टन यानी 9 रैक यूरिया की मांग की गई है. 6 सेंटर पर पुलिस के साये में फिलहाल यूरिया बांटा जा रहा है. कलेक्टर का कहना है कि अगर जल्द खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है.

श्योपुर– जिले में 9 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है. सरकार ने अब तक 4900 मीट्रिक टन यूरिया ही उपल्ब्ध करवाया है.

सीहोर– कलेक्टर ने सरकार को पत्र भेजकर कहा कि यहां यूरिया की कमी से किसान नाराज हैं. भारतीय किसान संघ द्वारा इस मुद्दे पर आंदोलन करने की योजना है.

मंदसौर– कलेक्टर ने पत्र भेजकर कहा कि प्राथमिक साख सहकारी समितियों में यूरिया न होने से किसानों को मांग के मुताबिक यूरिया नहीं दे पा रहे हैं.

नीमच– जिले की मनासा तहसील में सरकारी भंडारण समाप्त हो जाने के कारण खुले बाजार में यूरिया डेढ़ गुना कीमत पर बेचा जा रहा है.

खंडवा– यूरिया है नहीं, किसान प्राइवेट सेक्टर से महंगे दाम पर खरीद रहे हैं जिसके कारण किसानों का आक्रोश कभी भी भड़क सकता है.

अशोकनगर– दुकानदारों के पास यूरिया उपलब्ध नहीं है. सरकारी केंद्र में भारी भीड़ उमड़ रही है. एक हजार मीट्रिक टन और चाहिए.

हरदा– खाद की कमी के कारण किसानों में आक्रोश है और अगर जल्द खाद की कमी नही दूर की गई तो आने वाले समय में किसान सड़क पर आ सकते हैं.

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