UP के DGP ने कहा था कि थानेदारों का CUG फोन ऑन रहे.. लेकिन शायद अयोध्या पुलिस के एक थाने के लिए नहीं

उत्तर प्रदेश की पुलिस को चुस्त और जवाबदेह बनाने के लिए DGP ने तमाम कदम उठाये , उन्होंने अपने साथ साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक से इस मुद्दे पर लगातार सम्पर्क रखा और तमाम बदलाव आदि करने की हर सम्भव कोशिश की . लेकिन उनके ही अधिनस्थो में तमाम ऐसे भी हैं जो पूरी कोशिश में हैं कि किस प्रकार से अपने कृत्यों के द्वारा योगी आदित्यनाथ और DGP के तमाम प्रयासों पर पानी फेरा जाय ..

ज्ञात हो कि अयोध्या पुलिस का महराजगंज थाना जिले को अम्बेडकरनगर जिले से जोड़ने के मार्ग पर पड़ता है . ये थाना वर्तमान समय में अपराध दमन में काफी पीछे छूट रहा है और कहना गलत नहीं होगा कि पूरे जिले की पुलिस के लिए शर्मिंदगी का कारण बन चुका है . यहाँ पर जहाँ पढने जाने वाली बेटियों के साथ रास्ते में दुर्व्यवहार आदि की घटनाएँ सामने आ रही हैं तो वहीँ कुछ गाँवों में अवैध शराब आदि के बनाने की भी खबरे हैं .

इन सबके पीछे अगर गहराई से विचार किया जाय तो सबसे पहले स्थानीय थानाध्यक्ष की निष्क्रियता ही प्रमुख कारण है . खुद सुदर्शन न्यूज ने जब थाना महराजगंज को फोन मिलाया तो सामने आई इस क्षेत्र में अपराध बढने की मुख्य वजह . थानाध्यक्ष महोदय का फोन या तो लगातार बंद आता है , या नॉट रीचबल मिला . अगर किसी कारण से थोड़े समय के बाद ये ऑन भी होता है तो उस पर आने वाले फोन को काट दिया जाता है . कुछ बार ये लगातार बजता है जिसको उठाने वाला कोई नहीं होता . थानाधय्क्ष महोदय का सरकारी CUG नम्बर 9454403305 है जिस पर २ दिन में अलग अलग समय फोन किया गया और वो फोन तमाम प्रयासों के बाद भी सम्पर्क में नहीं आ सका . एक बार जब जैसे तैसे ये मिल भी पाया तो उस फोन को कट कर दिया गया .. .. जबकि उन्ही के आस पास उसी सर्विस प्रोवाइडर के तमाम फोन ठीक से चलते पाए गये .

सवाल ये बनता है कि क्या ये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के और DGP उत्तर प्रदेश के उन आदेशो का उल्लंघन नहीं है जो उन्होंने विशेष तौर पर पुलिसकर्मियों को दिए थे . इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय का भी गत वर्ष आदेश था कि किसी दागी पुलिसकर्मी को थानेदारी न दी जाय..  सवाल ये है कि अगर उसी समय कोई पीड़ित या पीडिता अपने प्राणरक्षा आदि के लिए थानेदार महोदय को फोन मिला रहा होता तो उसका क्या हाल हुआ होता . क्या डायल 100 की सुविधा आने के बाद अब स्थानीय थानों ने खुद को विश्राम मुद्रा में कर रखा है या ये महज एक महराजगंज थाने की ही रीति है .. उपरोक्त प्रश्न निश्चित तौर पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं कि क्या सुरक्षा आदि के मद्देनजर अतिसंवेदनशील कहे जाने वाले अयोध्या जनपद में स्थानीय जनता सुरक्षित महसूस करे खुद को ..

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