20 लोगों के मुस्लिम परिवार ने ओढ़ लिया भगवा… बोला- “शांति, शुकून और सम्मान है हिंदुत्व में”

मेरे साथ जो हुआ है तथा जो हो रहा है..उस आधार पर मैं ये कह रहा हूँ कि हिन्दू धर्म में शांति है, सुकून है तथा सम्मान है और यही कारण है कि मैं तथा मेरा परिवार आज से इस्लाम का त्याग करके हिन्दू धर्म को अपना रहे हैं. और इसके बाद पूरे वैदिक विधि विधान के साथ अख्तर अली तथा उसके 20 लोगों के पूरे परिवार ने भगवा ओढ़ लिया, हिंदुत्व को अपना लिया. एक साथ 20 लोगों के इस्लाम को छोड़कर हिंदुत्व को अपनाने  की खबर सामने आने के बाद हलचल मच गयी है. इस खबर के बाद  जहाँ हिन्दू संगठनों ने जहाँ बख्तर अली तथा उसके परिवार का धूमधाम से हिन्दू धर्म में घर वापसी पर स्वागत किया है वहीं कट्टरपंथी मौलानाओं ने ये गलत कदम बताया है.

मामला उत्तर प्रदेश के बागपत के छपरौली थाना क्षेत्र के बदरखा गाँव का है. इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने वाले अख्तर अली का कहना है कि अपने समाज के लोगों की गुंडागर्दी, दबंगई से पीड़ित होकर उन्होंने ये फैसला लिया है क्योंकि जहाँ उनके मुस्लिम समाज   के लोग प्रताड़ित करते हैं वहीं हिन्दू धर्म में लोगों का सम्मान किया जाता है, इज्जत दी जाती है और अब वह मुस्लिम नहीं बल्कि हिन्दू बन चुके हैं. आपको बता दें कि बदरखा गांव के रहने वाले अख्तर अली का बेटा कपड़े का व्यापार करता था. जुलाई माह में उनके बेटे गुलहशन अली का शव उनकी ही दुकान में खूंटी पर लटका हुआ मिला था. परिजनों का आरोप था कि मुस्लिम समाज के ही कुछ दबंगों ने उसकी हत्या करने के बाद शव को खूंटी पर लटका दिया था. इसके बाद मुस्लिम समाज के g लगातार बख्तर अली  को परेशान कर रहे थे.

अख्तर अली और उनके परिवार का कहना है कि इस्लाम धर्म में रहकर अपने बेटे को न्याय नहीं दिला सकते क्योंकि मुस्लिम धर्म के दबंगों ने ही हमारे बेटे की हत्या की है. अभी भी पूरे परिवार का जीना मुहाल कर रखा है. दबंग आरोपी आए दिन परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. जिसकी दहशत में पीड़ितों ने अपना गांव छोड़ दिया है. इस वजह से उन्होंने इस्लाम धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला किया है. उन्हें भरोसा है कि हिन्दू धर्म में रहकर ही न्याय मिल सकता है. आज मंगलवार को अख्तर अली तथा उसके परिवार ने हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार यज्ञ पूजन के बाद बदरखा गांव में शिव मंदिर में हिन्दू धर्म अपनाया तथा हिन्दू धर्म के अनुसार अपना  नामकरण किया.

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