वन्देमातरम तथा भारतमाता की जय के बाद अब निशाना बना तिरंगा… कांग्रेस सरकार में मंत्री मोहम्मद अकबर ने नहीं दी तिरंगे को सलामी

अभा तक उनको राष्ट्रगीत वन्देमातरम से समस्या होती थी. वो कहते रहे हैं कि वह वन्देमातरम नहीं गायेंगे क्योंकि उनका मजहब वन्देमातरम कहने की इजाजत नहीं देता. इसके बाद उन्होंने कहा कि वह भारतमाता की जय भी नहीं बोलेंगे क्योंकि उनका मजहब भारतमाता की जय बोलने की भी इजाजत नहीं देता. यहाँ तक कहा गया कि अगर उनकी गर्दन पर चाकू भी रख दिया जाए तो भी वह भारतमाता की जय नहीं बोलेंगे. तो अब उनके निशाने पर आया है भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा.

आपको बता दें कि कल गणतन्त्र दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की कांग्रेस में मंत्री मोहम्मद अकबर ने ध्वजारोहण के बाद तिरंगे को सलामी नहीं दी. मोहम्मद अकबर उसी कांग्रेस सरकार में मंत्री हैं जो वन्देमातरम न कहने को अभिव्यक्ति की आजादी बताती है, जो भारतमाता की जय बोलने वालों का समर्थन करती है तथा कहती है ये अभिव्यक्ति की आजादी है. खुद को देश की आजादी के आन्दोलन का ठेकेदार बताने वाली कांग्रेस ने पहले हामिद अंसारी जैसे लोगों को देश का उपराष्ट्रपति बनाया जो उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी अपनी मजहबी शरीयत से ग्रसित मानसिकता से को नहीं छोड़ पाए.

इसी मानसिकता का नया रूप छतीसगढ़ के कवर्धा में सामने आया जब भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री मोहम्मद अकबर ने तिरंगे को सलामी नहीं दी. हिंदुस्तान की आन बान और शान तिरंगे को सलामी देकर जहाँ पूरा राष्ट्र गर्व महसूस करता है, जिस तिरंगे को लहराता हुआ देखते ही भारतीय सेना के जांबाज जवानों का लहू लावा बनकर दौड़ने लगता है तथा जिसकी रक्षा के लिए वह अपने प्राणों का बलिदान तक कर देते हैं, उस तिरंगे को सलामी देने को कांग्रेस का मंत्री साफ़ इनकार कर देता है. आश्चर्य की बात ये है कि देश की ज्यदातर मीडिया ने मोहम्मद अकबर के इस दुस्साहस को नहीं दिखाया है. कांग्रेसी मंत्री मोहम्मद अकबर द्वारा तिरंगे को सलामी न देने का विडियो सामने आने के बाद जहाँ भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर हमलावर है तो देश की राष्ट्रवादी जनता आक्रोशित है व मोहम्मद अकबर के खिलाफ कार्यवाई की मांग कर रही है. अब देखना ये होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मोहम्मद अकबर के खिलाफ कार्यवाई करते हैं या नहीं.

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