योग को बताया ईसाई विरोधी और कर दिया मनाने से इंकार.. ये कोई आम नागरिक नहीं बल्कि है एक सरकार

जिस योग को पूरी दुनिया ने स्वीकार लिया, जिस योग की पताका आज पूरी दुनिया में शान से लहरा रही है, जो योग आज पूरी दुनिया में स्वीकार्य हो चुका है, दुनिया का हर राष्ट्र योग को एक धरोहर के रूप में ले रहा है तथा अपना रहा है. चाहे वह ईसाई राष्ट्र हों या मुस्लिम राष्ट्र, हर जगह योग को स्वीकार किया गया है. लेकिन कितने अफ़सोस तथा शर्म की बात है कि हिंदुस्तान के ही एक राज्य की सरकार इसलिए योग दिवस को मनाने से इंकार कर देती है क्योंकि उनके अनुसार योग ईसाई विरोधी है.

कल 21 जून को पूरी दुनिया में धूमधाम के साथ योग दिवस मनाया जा रहा था. हिंदुस्तान में आम जनता से लेकर बॉर्डर पर  भारतीय सेना के जवानों तक ने योग दिवस मनाया था लेकिन हिंदुस्तान में ही एक ऐसा भी राज्य था जहा योग दिवस नहीं मनाया गया, और वो राज्य था कांग्रेस के शासन वाला मिजोरम. मिजोरम सरकार ने योग दिवस को नहीं मनाने का फैसला लिया क्योंकि मिजरों सरकार के अनुसार योग हिंदुत्व का प्रतीक है तथा ईसाई विरोधी है. खबर के मुताबिक, राज्य के मुख्यमंत्री लल थनहवला और उनके कैबिनेट मंत्री ने योग दिवस नहीं मनाने का फैसला किया.  राज्य के युवा और खेल मंत्री ज़ोडिंगतलुआंगा ने कहा, ‘मुझे योग दिवस के बारे में कुछ नहीं पता है तथा उन्हें अन्य काफी काम है. मिजोरम सरकार का मानना है कि राज्य की बहुसंख्यक आबादी ईसाई है और योग ईसाई विरोधी है.

आश्चर्य होता है कि ब्रिटेन, अमरीका सहित सारे ईसाई देशों ने न सिर्फ योग को हाथों-हाथ लिया बल्कि २१ जून को योग दिवस के रूप में मनाया. दुनिया भर के ईसाई मुल्कों के लिए योग ईसाई विरोधी नहीं है लेकिन कांग्रेस शासित राज्य में योग ईसाई विरोधी हो जाता है.

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