“हम सेकुलर लोग हैं और सरस्वती पूजा करने से ख़त्म हो जायेगा सेक्यूलरिज्म”.. इतना कहकर रद्द कर दिया गया आयोजन

हिंदुस्तान की तथाकथित सेक्यूलर राजनीति ने एक बार फिर से अपना गुल खिलाया तथा वामपंथी शासित केरल की नामी यूनिवर्सिटी में हिन्दू छात्रों को सरस्वती पूजा की इजाजत नहीं मिली. केरल के कोच्चि की एक यूनिवर्सिटी ने उत्तर भारतीय छात्रों को कैंपस में सरस्वती पूजा की अनुमति देने से ये कहते हुए इंकार कर दिया कि हमारा कैंपस धर्मनिरपेक्ष है और हम अपने परिसर में ऐसी किसी भी धार्मिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जा सकती है.

मामला कोच्चि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेकनॉलिजी के अंतर्गत आने वाले कोच्चि यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग के कुट्टनड़ कैंपस का है. यहां कुछ उत्तर भारतीय छात्रों ने वसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा करने के लिए वाइस चांसलर से परमिशन मांगी थी. छात्रों ने वीसी को 25 जनवरी को पत्र लिखकर इस आयोजन के लिए अनुमति मांगी थी. इस पत्र के जवाब में यूनिवर्सिटी के ज्वाइंट रजिस्ट्रार (अकादमिक) ने छात्रों को जवाब लिखा है उसमें वाइस चांसलर का हवाला देते हुए कहा गया है, ‘सूचित किया जाता है कि उत्तर भारतीय छात्रों द्वारा सरस्वती पूजा करने के अनुरोध को वाइस चांसलर ने अस्वीकार कर दिया है, क्योंकि हमारा कैंपस धर्मनिरपेक्ष है,  इसलिए हम कैंपस में ऐसी किसी भी कार्य और गतिविधि की इजाजत नहीं देते जो किसी धर्म विशेष का हो. ‘

सरस्वती पूजा पर रोक उसी केरल में लगाई गई है जहाँ एक समय कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सरेआम गाय को काटा था. उसी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिसके अध्यक्ष राहुल गांधी आज खुद को जनेऊधारी हिन्दू कहते हैं. इसके सबरीमाला मंदिर की परंपरा तथा पवित्रता को जबरन भंग कराया गया तथा अब वहां सरस्वती पूजा को रोक दिया गया है. हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल माघ महीने में शुक्ल की पंचमी को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की उपासना होती है. इस साल पूरे भारत में वसंत पंचमी 10 फरवरी को मनाई जाएगी.

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