जहाँ जाते हैं IPS दिनेश कुमार P , वहीँ क्यों होती हैं जहरीली शराब से मौतें ? सहारनपुर से पहले शामली में भी हुआ था कुछ ऐसा ही

ये महज संयोग है या कुछ और ही एंगल ? सहारनपुर में जहरीली शराब से हुई मौतों ने एक बार फिर से प्रदेश को हिला कर रख दिया है . घरों से निकलती महिलाओं की चीत्कार और मासूम अनाथ हो चुके बच्चो का करुण क्रन्दन हिला कर रख देने वाला है न सिर्फ प्रदेश को बल्कि पूरे देश को एक साथ में . उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जिला जहाँ पर रो रो कर एक सब इंस्पेक्टर आत्महत्या कर लेता है वहां पर अपराधी इतना ज्यादा निश्चिंत क्यों रहता है कि उसको मौका मिल जाए इतने लोगों को एक साथ मौत के मुह में धकेलने का ..

अगर गौर किया जाय पुलिस विभाग पर तो इस समय सहारनपुर की कमान आईपीएस दिनेश कुमार पी के हाथो में है . ये वही आईपीएस अधिकारी हैं जो कुछ समय पहले पिछली पोस्टिंग में शामली जिले के कप्तान हुआ करते थे . उस समय उनकी कप्तानी के समय काल में ठीक ऐसी ही घटना ने आम जनता को झकझोर दिया था लेकिन तब शासन के कानों तक वो चीखें नहीं गयी और उनको उस से बड़ा पद दे कर एक प्रकार से उन्हें शाबाश बोला गया उत्तर प्रदेश के शासन द्वारा ..

ये घटना थी 22 अगस्त 2018 की और स्थान था गाँव कमालपुर जो शामली के झिंझाना थानाक्षेत्र में पड़ता था . यहाँ पर पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी के समय काल में ही अवैध शराब का कारोबार इतना ज्यादा चरम पर था कि उसको पीने के चलते लगभग आधे दर्जन लोग मौत के मुह में चलते गये थे . सूत्रों के अनुसार उस समय कानूनी कार्यवाही के नाम पर ऐसी लीपापोती हुई थी कि बाद में इसी जहरीली शराब के दुष्प्रभाव से मरे और लोगों को दूसरी बीमारी से मरा गया बताया गया था .

एक बार फिर से सहारनपुर में वही पुलिस अधिकारी हैं जो शामली में आधे दर्जन मौतों के समय हुआ करते थे . इनके रवैये के चलते अभी तक सहारनपुर ही नहीं बल्कि उत्तराखंड तक मौतें होना बताया जा रहा है . सहारनपुर की सीमायें हरियाणा और उत्तराखंड से लगती हैं जिस से आने वाले समय में इसी पुलिसिंग के चलते योगी आदित्यनाथ सरकार को हरियाणा और उत्तराखंड तक की सरकारों को जवाब देना पड़ सकता है . फिलहाल ये उत्तर प्रदेश शासन के सोचने का विषय है कि आखिर सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी के साथ ऐसा क्या संयोग है कि उनकी तैनाती वाले स्थलों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति लगी रहती है .. साथ ही सवाल ये भी खड़ा होता है कि शामली में हुई मौतों के बाद उनको पदोन्नति दे कर सहारनपुर का कप्तान बनाया गया था . क्या अब इन दर्जनों मौतों के बाद फिर से उत्तर प्रदेश शासन उनके बारे में फिर से वैसा ही कुछ दोहराएगा ?

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