इधर केजरीवाल अपनी पार्टी के स्थापना दिवस की तैयारी में व्यस्त थे तो उधर बांग्लादेशी दिल्ली में बरसा रहे थे कहर.. महिलायें थी उनके निशाने पर, सोमनाथ भारती की तरह

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी आम आदमी पार्टी के स्थापना दिवस(26 नवम्बर) की तैयारियों में व्यस्त थे तो उधर बांग्लादेशी उन्मादी गैंग दिल्ली में कहर बरपा रहा था. घटना 23 नवम्बर की है जब दक्षिण दिल्ली के तैमूर नगर में आधी रात को पुलिस और बांग्लादेशी लुटेरों के बीच मुठभेड़ हो गई. इस मुठभेड़ में गोली लगने से दो लुटेरे गोली लगने से घायल हो गए. इसके साथ ही पुलिस ने पांच लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया. इस बांग्लादेशी गैंग के बारे में जो सनसनीखेज खुलासा हुआ वो काफी हैरान करने वाला है. पता चला है कि ये बांग्लादेशी गैंग लूट के बाद महिलाओं की आबरू से खेलता था.

डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राम गोपाल नायक ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि एक बांग्लादेशी गिरोह न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में डकैती की योजना बना रहा है. इसके लिए गिरोह के सदस्य तैमूर नगर में इकट्ठे होंगे. डीसीपी ने बताया कि सूचना के आधार पर शुक्रवार रात लगभग 1 बजे, पुलिस की 10 सदस्यीय टीम तैमूर नगर पहुंचकर संदिग्धों को घेर लिया और उनसे सरेंडर करने को कहा, लेकिन गिरोह के सदस्यों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसकी जवाबी कार्रवाई के लिए पुलिस को भी मजबूर होना पड़ा. इस मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से घायल हुए दो बांग्लादेशी लुटेरों के साथ ही पुलिस ने गिरोह के तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया.

दिल्ली पुलिस ने जो बांग्लादेशी लुटेरे पकड़े हैं, उनका नेटवर्क हैरान करने वाला है. इनके पास भारत का कोई भी दस्तावेज नहीं है, लेकिन ये वारदात को अंजाम देकर इस तरह से बांग्लादेश निकल जाते हैं जैसे इनके पास लीगल वीजा और पासपोर्ट सब कुछ हो. यह बांग्लादेशी गैंग लूट के बाद महिलाओं की आबरु से खेलता था. गैंग के सदस्य लूट के बाद रेप की वारदात को इसलिए अंजाम देते थे ताकि पीड़ित परिवार अपमान के डर से पुलिस को लूट या डकैती की सूचना न दे. दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त राजीव रंजन के मुताबिक, यह गैंग दिल्ली-एनसीआर के अलावा गोवा, आगरा, कोटा, गुजरात व राजस्थान सहित करीब दर्जनभर राज्यों में सक्रिय रहा है. गैंग के सदस्य बिना किसी रोक-टोक के बांग्लादेश से भारतीय सीमा में प्रवेश कर जाते थे. इसके बाद वे अपना टारगेट तय कर वहां की तीन-चार बार रेकी करते थे.

उन्होंने बताया कि वारदात को अंजाम देकर लुटेरे आसानी से बांग्लादेश चले जाते थे. यह गैंग एक राज्य में महीने भर तक किराये के मकान में रह कर लगातार वारदात करता रहता है. जल्दी-जल्दी ठिकाना बदलने की वजह से ये न तो स्थानीय लोगों में पहचाने जाते हैं और न ही वहां की पुलिस इनका अता-पता लगाने में सक्षम होती है. दिल्ली में इस गैंग के सदस्य सीमापुरी, लोनी और सोनिया विहार जैसे इलाकों में झुग्गी किराये पर लेकर रहते हैं. पुलिस के मुताबिक ये पांचों पिछले 18 सालों से अवैध तरीके से रहकर भारत में अलग-अलग राज्यों में ताबड़तोड़ वारदात कर रहे थे. इनके सरगना का नाम फारुक है. इन्होंने दिल्ली, कर्नाटक, यूपी और गोवा में कई वारदातें की है. साल 2001 में ये लोग प्रशांत भूषण और आबकारी विभाग में काम करने वाले एक बड़े अधिकारी के घर भी वारदात कर चुके हैं. हाल ही में दिल्ली के प्रीत विहार में एक सब इंस्पेक्टर को भी गोली मारी थी. इनके पास इनके पास से 3 पिस्टल,कारतूस और घर के लॉक ,अलमारियां तोड़ने के औजार बरामद किए है.

Share This Post

Leave a Reply