वामपंथ और श्रीराम भक्ति.. ये क्या हो रहा है केरल में ?

हिन्दू राष्ट्रवाद के प्रवर्तक, अमर हुतात्मा वीर सावरकर जी ने एक समय कहा था कि आज देश में ज्यादातर राजनेता हिन्दुओं तथा हिन्दू आस्थाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं तो इसका कारण ये है कि आज हिन्दू बिखरा हुआ है, हिन्दू संगठित नहीं है. लेकिन में हिन्दुओं से कहना चाहता हूँ कि जिस दिन आप एक हो जाओगे, जिस दिन हिन्दू संगठित हो जाएगा तो आज जो राजनेता हिन्दुओं को दरकनिकार कर रहे हैं, हिन्दू आस्थाओं का मजाक उड़ा रहे हैं, अपमान कर रहे हैं..ये सभी अपने अपने कोट के ऊपर जनेऊ पहिनेंगे तथा चीख चीख कर रहेंगे कि वह हिन्दू हैं, हिन्दुओं का सम्मान करते हैं, हिन्दू आस्थाओं का सम्मान करते हैं.

अब वामपंथ शाषित केरल से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जो सावरकर जी की इस बात को शत-प्रतिशत सत्य साबित कर रही है. जी हाँ आपको बता दें कि केरल की वामपंथी सरकार ने, वामदलों ने केरल में रामायण माह मनाने का निर्णय लिया है. वामदलों द्वारा प्रभु श्रीराम कि भक्ति करना हिन्दुस्तान की राजनीती में एक बड़े बदलाव का संकेत है क्योंकि वामदलों की सोच हिन्दू विरोध की रही है तथा ये लोग हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते रहे हैं.केरल में हिन्दु समुदाय के बीच बीजेपी की बढ़ती पैठ को रोकने के लिए सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) अब धर्म की राह पकड़ती दिख रही है. पार्टी इसी योजना के तहत यहां रामायण माह मनाने की तैयारी में है. इस दौरान पार्टी रामायण की महत्व और सामाजिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राज्य भर में सेमिनार, सम्मेलन और लेक्चर्स आयोजित कराएगी.

सी.पी.एम.  कमेटी ने पार्टी से जुड़े मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने का फैसला किया, जिससे कि राज्य की मंदिर समितियों पर बीजेपी नेताओं की पकड़ रोकी जा सके.  इसके तहत अलापुझा में 25 जुलाई को एक राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध लेखक व आलोचक सुनील पी इलाईदाम करेंगे. इसके अलावा जिला स्तर पर रामायण पर लेक्चर भी आयोजित किया जायेगा. जो सी.पी.एम. खुद को धार्मिक मामलों से दूर रखती आयी है तथा हिन्दू आस्थाओं के अस्तित्व को ही नकारती आयी है वो सी.पी.एम. आज श्रीराम की भक्ति करने को मजबूर है तो निश्चित रूप से हिन्दू समाज की एक बड़ी जीत है, संगठित हिंदुत्व की जीत है.

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