बेटी को सिन्दूर लगाता व चूड़ी पहनता नहीं देख पाया वो… हिन्दू दामाद खटक रहा था उसकी नजर में और बोला- “दलित मुस्लिम एकता की बातें सिर्फ राजनीति में”

दलित मुस्लिम एकता तथा जय भीम जय मीम के नारे संजय ने भी सुने थे. जब तमाम संगठन तथा राजनेता दलित मुस्लिम एकता का दंभ भरते थे तो संजय की उम्मीदों को पर मिल जाते थे क्योंकि वह हिन्दू(दलित) समाज से था तथा एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता था. दलित मुस्लिम एकता की बातें सुन उसे लगा कि वह अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचा सकता है. फिर यही किया संजय ने.. मुस्लिम लड़की से प्यार किया तथा अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाते हुए उसने अपनी मुस्लिम प्रेमिका से शादी कर ली. लेकिन शायद वो नहीं जानता था कि दलित मुस्लिम एकता के नारे सिर्फ राजनैतिक नारे हैं तथा फिर संजय के साथ वही हुआ जो दिल्ली के अंकित सक्सेना के साथ हुआ था. अंकित ने भी मुस्लिम लड़की से प्यार किया था तथा मजहबी जिहादी उन्मादिओं ने उसकी गला रेतकर ह्त्या कर दी तो इधर संजय ने भी मुस्लिम लड़की से शादी की तो उसकी भी गला रेतकर ह्त्या कर दी गयी.

मामला देश की राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद का है. खबर के मुताबिक़, फरीदाबाद के एक हिंदू(दलित) लड़के संजय ने मुस्लिम लड़की के साथ प्रेम विवाह किया, लेकिन दलित मुस्लिम एकता की बात करने वालों को ये रास नहीं आया तथा लडकी के परिजनों ने संजय की ह्त्या कर दी. संजय की ह्त्या पर न तो दलित समाज के ठेकेदार कुछ बोल रहे हैं और न ही मुस्लिम समाज के ठेकेदार. जिस सलीम की बहन के साथ संजय ने प्रेम विवाह किया था, उसको ये एक हिन्दू बहनोई तथा उसके अब्बू को हिन्दू दामाद कतई स्वीकार नहीं था. जब उसकी बेटी संजय के नाम का सिन्दूर लगाती, हिन्दू धर्म के अनुसार व्रत रखती तो उसका पिता सलीम अंदर ही अंदर जलने लगा. पहले उसने संजय से इस्लाम अपनाकर मुस्लिम बनने की बात कही लेकिन जब संजय ने इससे इंकार कर दिया तो सलीम ने संजय की ह्त्या करने की ठान ली तथा फिर एक दिन उसको विश्वास में लेकर मिलने बुलाया तथा उसका क़त्ल कर दिया.

मृतक संजय के परिजनों की शिकायत के बाद गिरफ्तार किये गये सलीम ने पुलिस की गहन पूंछताछ के दौरान बताया कि मैंने योजना के अनुसार, संजय के साथ बैठकर दारु पी थी. उसके बाद चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी थी जिसकी डेड बॉडी सैनिक कॉलोनी के खाली जगह कीकर के पेड़ों में फेक दिया था. मृतक संजय के परिजनों का कहना है कि युवती गर्भवती थी, उसके परिजनों ने उसका गर्भपात करा दिया. संजय के परिजन कहते हैं कि अगर वह धर्म परिवर्तन कर लेता, मुसलमान बनकर कलमा पढ़ने  लगता तो शायद उसकी जान नहीं जाती लेकिन उनके बेटे ने अपना धर्म नहीं छोड़ा, इसलिए उसकी हत्या कर दी गयी.

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