मजहबी आक्रांताओं से अपना सब कुछ लुटाकर भारत आये वो 90 हिन्दू मुस्कुरा उठे जब उन्हें प्रदान की गई भारत की नागरिकता..

उन 90 हिन्दुओं ने पाकिस्तान में अन्तहीन प्रताड़ना झेली, नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ा. जब वो अत्याचार सह न सके तो भारत आ गए लेकिन पाकिस्तान से भारत आये इन हिन्दुओं के चेहरे पर उस समय मुस्कराहट आ गई तथा खुशी के आंसू झलक पड़े, जब इनको हिंदुस्तान की नागरिकता प्रदान की गई. जैसे ही भारत की नागरिकता का प्रमाण पात्र पाकिस्तान से भारत आये इन हिन्दुओं को भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र सौंपा गया तो पूरा सभागार भारतमाता की जय तथा वन्देमातरम के नारों से गूज उठा. 

मामला गुजरात के अहमदाबाद का है जहां पाकिस्तान से आए 90 हिंदुओं को शुक्रवार को एक कार्यक्रम में अहमदाबाद जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिकता प्रदान की. जिलाधिकारी विक्रांत पांडे ने 90 आवेदकों को नागरिकता कानून 1955 के प्रावधानों के अनुसार भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र दिया. जिलाधिकारी विक्रांत पांडे ने कहा, ‘2016 में केंद्र ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों- हिंदुओं और सिखों को नागरिकता जारी करने की प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण किया था.’ दिसंबर 2016 में जारी एक गजट अधिसूचना के तहत गुजरात के अहमदाबाद, गांधीनगर और कच्छ के जिलाधिकारियों को राज्य में रह रहे इन समुदायों के आवेदकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की शक्तियां दी गई थी. पांडे ने कहा, ‘आज 90 लोगों के साथ ही अमहदाबाद नई व्यवस्था प्रभावी होने के बाद ऐसी नागरिकता प्रदान करने में देश में सभी जिलों में अगुवा हो गया है. साल 2016 से अहमदाबाद जिला समाहरणालय 320 लोगों को नागरिकता प्रदान कर चुका है. उनमें 90 फीसद पाकिस्तान से हैं और बाकी बांग्लादेश से.’

हिंदुस्तान की नागरिकता पाने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुजरात सर्कार तथा अहमदाबाद प्रशासन को धन्यवाद दिया. उनमें से कुछ ने पाकिस्तान के अपने अनुभव साझा किये जिनकी वजह से वे अपना कारोबार और प्रियजन को छोड़कर आने के लिए बाध्य हुए. भरतकुमार खटवानी ने कहा, ‘कराची में मेरा एक सुपरस्टोर था लेकिन वहां की खराब कानून व्यवस्था के चलते मुझे यहां आना पड़ा. वहां हिंदुओं को निशाना बनाया जाता है. छोटे शहरों में यह आम बात है. पाकिस्तान में हिंदुओं को खुद को बचाने के लिए अपनी पहचान छिपानी होती है.’ मीराबेन माहेश्वरी (70) ने दावा किया कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में उनकी बेटी को अगवा कर उसे मुसलमान बना दिया गया था. उन्होंने कहा कि जब वह हिन्दुस्तान आये थे तो उस समय ऐसा लगा था जैसे हम अपने घर वापस आये हैं. उन्होंने कहा कि अब उन्हें न तो दुःख है और न कोई चिंता क्योंकि उन्हें भारतमाता की गोद में आश्रय मिल चुका है.

Share This Post

Leave a Reply