उधर CRPF पहुची, इधर कोलकाता पुलिस ने छोड़ दिए CBI अफसर

केन्द्रीय और राज्य के बलों के बीच में इतना बड़ा विरोधाभास अक्सर कश्मीर में ही देखने को मिलता था जहाँ पर एक बार भारत माता की जय बोलने पर छात्रों की पिटाई हुई थी कश्मीर की पुलिस द्वारा और बाद में वहां पर CRPF ने पहुच कर हालात को सम्भाला था जिसके बाद छात्रों ने चैन की सांस ली थी . अब एक बार फिर से केन्द्रीय बलों और राज्य बल के बीच ऐसे विरोधाभास पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है जो ममता बनर्जी द्वारा शासित है .

विदित हो कि देर रात शुरू हुए राजनैतिक उठापटक के बाद जब CBI अफसरों को कोलकाता पुलिस ने हिरासत में ले लिया था तब केंद्र से सीबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय की सुरक्षा के लिए CRPF के जवान भेजे गये थे . इस मामले ने जैसे ही तूल पकड़ना शुरू किया वैसे ही कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के अफसरों को रिहा कर दिया .. यद्दपि ये रिहाई केंद्र सरकार के कड़े कदम के बाद बताई जा रही है क्योकि एक समय तो CBI के ऊपर यही कोलकाता पुलिस कार्यवाही पर आमदा दिख रही थी .

सीबीआई के अंतरिम प्रमुख एम नागेश्वर राव ने बताया कि जांच एजेंसी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएगी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि सीबीआई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक ही इस पोंजी स्कैम की जांच में जुटी है।  सीबीआई के अंतरिम चीफ एम नागेश्वर राव ने कहा-  राजीव कुमार के खिलाफ सबूत थे कि न्याय को प्रभावित करने और सबूतों को नष्ट करने में उनका रोल था। हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर घोटाले की जांच कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पहले राजीव कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया था। पुलिस ने सभी साक्ष्यों का चार्ज अपने पास ले लिया, सभी दस्तावेज सीज कर दिए। वे लोग हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहे थे। हमें दस्तावेज देने में भी सहयोग नहीं किया गया। बहुत सारे साक्ष्य नष्ट कर दिए गए, या फिर गायब हो गए।

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