बिहार के बड़े सफेदपोशों से लड़ती इस जांबाज IPS ने पेश की नारी शक्ति की एक नई मिशाल

6 सितंबर को SCST के खिलाफ सवर्णों के भारत बंद के दौरान बिहार के मधेपुरा सांसद और जनअधिकार पार्टी के संरक्षक  पप्पू यदाव मीडिया के सामने रोते हुए पेश हुए थे तथा कहा था कि उनकी पिटाई की गयी है. पप्पू यादव ने आरोप लगाया है कि बंद समर्थकों ने उनकी हत्या करने की कोशिश की, जिसमें मुजफ्फरपुर एसएसपी हरप्रीत कौर भी शामिल थीं. सांसद यादव के मुताबिक, जिस वक्त बंद समर्थक उन पर हमला कर रहे थे उन्होंने एसएसपी हरप्रीत कौर को फोन लगाया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव ही नहीं कि‍या. इसके बाद पप्पू यादव ने ये भी कहा था कि एसएसपी हरप्रीत कौर मीडिया को लव लेटर लिख रही हैं. पप्पू के इस बयान के बाद मुजफ्फपुर की एसएसपी हरप्रीत कौर मैदान में उतर आयी हैं तथा फेसबुक पोस्ट के माध्यम से पप्पू यादव को करारा जवाब दिया है.

एसएसपी हरप्रीत कौर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘नमस्कार, माननीय सांसद पप्पू यादव जी लगातार मीडिया में रोते हुए यह आरोप लगा रहे हैं कि उनके ऊपर बंद के दौरान मुजफ्फरपुर जिले में हमला हुआ, उनकी गाड़ी तोड़ दी गई, उनका मोबाइल तोड़ दिया गया, उनके समर्थकों के साथ मारपीट की गई। इस संदर्भ में मैं अपनी बात रखना चाहती हूँ. जब उन्होंने अपनी बात मीडिया में रखी तो कुछ मीडिया के लोगों ने हमसे संपर्क किया और पुलिस का पक्ष जानना चाहा तो मैंने कहा कि अगर इस तरह की कोई घटना हुई है तो माननीय सांसद महोदय को पुलिस में FIR दर्ज करवानी चाहिए’. उन्होंने आगे लिखा है, ‘मुजफ्फरपुर पुलिस को सांसद साहब और बंद समर्थकों के बीच हुए बातचीत का एक वीडियो मिला था जो हमने मीडिया को दिया, जिसमें किसी भी तरह कि हमले जैसी स्थिति नहीं मालूम चल रही थी। जबकि आजतक भी सांसद साहब के द्वारा इस संदर्भ में कोई F.I.R दर्ज नही करवाया गया है। न ही उनके आरोपों की पुष्टि के लिए उनके साथ हुई कथित मारपीट व तोड़फोड़ के सम्बन्ध में कोई साक्ष्य पुलिस या मीडिया के समक्ष रखा गया है.’

‘माननीय सांसद महोदय का यह आरोप है कि उन्होंने मुझे कॉल किया और मैंने फोन नहीं उठाया जबकि हकीकत यह है कि उस समय वरीय पदाधिकारी के द्वारा पुलिस लाइन का निरीक्षण चल रहा था । और जैसे ही हमें यह मैसेज मिला कि वह बात करना चाहते हैं तो तुरन्त हमने खुद सांसद महोदय से बात की और डीएसपी को घटनास्थल पर रवाना किया । 6 तारीख को माननीय सांसद साहब का मधुबनी जिले में कार्यक्रम था और मुज़फ़्फ़रपुर में कोई भी कार्यक्रम प्रस्तावित नहीं था। उनका आरोप है कि मुजफ्फरपुर पुलिस ने उनको एस्कॉर्ट नहीं दिया, यह बिल्कुल ही गलत है क्योंकि उनके उस दिन मुजफ्फरपुर आने की कोई भी लिखित या मौखिक सूचना पुलिस के पास नहीं थी। उनका प्रस्तावित कार्यक्रम मुजफ्फरपुर में 9 और 10 तारीख को है.’ ‘सांसद महोदय मीडिया में आकर बेहद आपत्तिजनक और तथ्यहीन आरोप लगा रहे हैं कि मैं उनकी हत्या की साजिश में शामिल हूँ. इस संदर्भ में उनकी जानकारी के लिए कहना है कि पुलिस का काम आम लोगों को सुरक्षा देना है न कि किसी की हत्या करवाना. हम एक पुलिस अधिकारी हैं जो कि ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपना काम कर रहे हैं । हमारी उनसे क्या दुश्मनी है भला । फिर भी लगातार सांसद महोदय इस तरह के निराधार आरोप लगा रहे हैं.’

एसएसपी ने आगे लिखा है, ‘दूसरी सबसे बड़ी बात है कि अपनी पद यात्रा के दौरान वह लगातार “नारी बचाओ आंदोलन” चला रहे हैं और स्वयं को महिलाओं के हितों के “रक्षक” बता रहे हैं और दूसरी तरफ एक महिला अधिकारी के संबंध में मीडिया में ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं कि ” एस एस पी मुजफ्फरपुर ने अपने चहेते पत्रकारों को लव लेटर लिख रही हैं “। जब कि मेरे द्वारा सिर्फ तथ्यों के आधार पर वस्तु स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की गई थी उस दिन मीडिया में । एक सांसद महोदय के द्वारा इस तरह की असंसदीय और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल एक महिला के लिए किया जाना कितना उचित है ? और एक तरफ सांसद महोदय नारी सम्मान की बात करते हैं और दूसरी तरफ एक महिला पुलिस अधिकारी के संबंध में मीडिया में लगातार अपमानजनक, असंसदीय और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.’

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