आदिल के नाम पर जलाते रहे जयपुर, जबकि उसमे बलि चढ़ा था भरत भी …माँ बोली – “इंसाफ दो”

खून बहाने में इतने अंधे हो जाते है कट्टरवादी इस्लामिक संगठन की भूल जाते है की बेगुनाहो को मार रहे है। ऐसे ही खून के प्यासे कट्टर मुस्लिमो ने भरत की जान ले ली। भरत की माँ टकटकी लगाए अब भी बैठी हुयी है की उसका लाल आएगा पर उसे क्या पता की उसका बेटे को कट्टर मुस्लिमो ने मार दिया। विकलांग युवक भरत की मां को यकीन ही नहीं हो रहा कि उसका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। ‘मेरा सोनू आएगा’, ये बोल बेटे के ई-रिक्शा को एकटक निहारती रही मां कैसे मारा होगा लाचार भरत को? उन दरिंदो का रूह नहीं कांपा होगा ?

मामला राजधानी जयपुर के रामगंज इलाके। जहाँ लाश को लावारिश बताकर एसएमएस मुर्दा घर में रखवा दिया गया था। उसकी लाश को देख के लोगो का गुस्सा फुट गया। मुस्लिम समुदाय ने भरत को सांप्रदायिक दंगे के ही दिन मार दिया था। शहर के रामगंज में हुई हिंसा में आदिल की मौत के बाद एक और युवक भरत कुमार की मौत हो गई है। ये मौत अभी नहीं हुई, बल्कि 8 सितंबर को ही हो गई थी। भरत ई-रिक्शा चलाकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। भरत ब्रह्मपुरी थाना इलाके के शंकर नगर इलाके रहता था।

किसी शख्स ने भरत के चाचा तोलाराम को फोन के जरिए यह बताया था कि इस घटना में भरत कुमार घायल हो गया, जिसे सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है। साथ ही ये बताया कि भरत का रिक्शा रामगंज इलाके में खड़ा हुआ है।तोलाराम को इस दौरान भरत का रिक्शा तो मिल गया, लेकिन भरत नहीं मिला। विकलांग भरत कुमार अपनी 65 वर्षीय की बूढ़ी मां का इकलौता सहारा था। जिसे मुसलमानो के उन्माद ने मार दिया। उसकी बूढ़ी माँ तीन दिनों से अन्न त्याग दिया है।
 

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