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दिल्ली में भी फ्रांस और ब्रिटेन जैसा हमला… कई लोगों और वाहनों को रौंदता चला गया नूरुद्दीन

क्या आतंकी समूह अब दिल्ली में फ़्रांस व ब्रिटेन की तरह कत्लेआम मचाना चाहते हैं? आपने कई बार सुना होगा कि फ्रांस के शहरों में आतंकियों ने गाड़ियों से कुचलकर लोगों की हत्याएं की है. 2014 में तो फ्रांस में अल्लाह हू अकबर कहते हुए 11 लोग गाड़ी से कुचलकर मार डाले गये गये तथा उस समय एक के बाद एक लगातार तीन ऐसी वारदातें हुई थी. इसके अलावा भी फ़्रांस में कई बार आतंकियों ने गाड़ियों से कुचलकर लोगों की हत्याएं की हैं वहीं ब्रिटेन में भी इसी अंदाज में आतंकी समूह लोगों की जान लेते रहे हैं.

देश की राजधानी दिल्ली के विवेक बिहार में बस ड्राइवर नूरुद्दीन ने जिस तरह से कई वाहनों और लोगों को रौंदा, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई, उससे भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कहीं ये कोई आतंकी वारदात तो नहीं थी? क्या फ्रांस व ब्रिटेन की तरह नये अंदाज में आंतकी अब हिंदुस्तान को लहूलुहान करना चाहते हैं? आपको बता दें कि विवेक विहार की लाल बत्ती पर खड़े कई वाहनों को रौंदने के मामले में पुलिस ने आरोपी बस चालक को दिल्ली-यूपी के बॉर्डर से दबोच लिया है. उसकी पहचान गली नंबर-5, हमदर्द नगर, अलीगढ़ निवासी नूरुद्दीन (33) के रूप में हुई है.

शाहदरा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चालक से पूछताछ के बाद मामले की छानबीन की जा रही है. बस का मेकेनिकल निरीक्षण भी कराया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी. बता दें कि पिछले दिनों विवेक विहार रोड नंबर-56 स्थित रामप्रस्थ की लाल बत्ती पर चार्टर्ड बस के चालक ने तीन बसों, दो ऑटो व दो बाइक और एक कार को टक्कर मार दी थी. हादसे में डीटीसी में काम करने वाले दो कर्मचारी सतीश कुमार और रुपेंद्र कुमार की मौत हो गई, जबकि चार अन्य जख्मी हो गए. 50 वर्षीय सतीश कुमार और ३८ वर्षीय रूपेंद्र कुमार की इसमें मौत हुई जबकि पूनम, गौतम, नरेंद्र और विनोद घायल हुए.

हमारा सवाल इसलिए है कि नूरुद्दीन ने स्कूली बच्चों से भरी बस को भी ठोकर मारी थी जो बच गये. फिर ऑटो और बीके सवार को कुचलता हुआ UP रोडवेज बस से भिड़ा दिया तथा बस से उतरकर अलीगढ़ भाग गया जहाँ से दिल्ली पुलिस उसे पकड़कर लाई. नूरुद्दीन गाजियाबाद के खोड़ा में किराए पर रहता था. लेकिन एक बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस पर भी खड़ा होता है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी उसको मात्र सेक्शन 304 व गैरइरादतन और 279 के तहत बुक किया गया जबकि पुलिस उसे सर्विलांस पर लगाकर पकड पाई. जबकि UP पुलिस के सिपाही द्वारा गलती से चली गोली पर उसको ह्त्या के तहत 302 लगाया गया और तत्काल बरखास्त भी किया गया जबकि नूरुद्दीन का अपराध को उससे कई गुना ज्यादा है तथा एक नजर में कहीं न कहीं ये आतंकी हमला भी प्रतीत होता है क्योंकि इसी अंदाज में विदेशों में आतंकी हमलों को अंजाम दिया जाता रहा है.

 

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