मुहर्रम के दौरान कुछ यूं बढ़ा मजहबी उन्माद कि भाजपा के विधायक तक को गिरफ्तार कर लिया उनकी ही सरकार शासित पुलिस ने

इस्लामिक त्यौहार मुहर्रम के जुलूस के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से हिंसा, आगजनी, मजहबी उन्माद की खबरें सामने आयी थी. योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा था. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जहाँ मजहबी उन्मादियों ने पुलिस की गाड़ी में आग लगा दी थे वहीं भीषण हमला करते हुए दरोगा का सर फोड़ दिया था. यही कुछ मिर्जापुर में भी हुआ था जहाँ मुहर्रम के ताजिये के कारण हरिदास नामक किसान की जान गयी. लेकिन उन्माद का सबसे बड़ा रूप बरेली में देखने को मिला जहाँ अपनी ही पार्टी की सरकार होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी के विधायक के खिलाफ पुलिसिया कार्यवाही की गयी.

खबर के मुताबिक़, बरेली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बरेली के विधायक राजेश मिश्रा पर मामला दर्ज किया है. विधायक पर जुलूस रोकने और भड़काऊ भाषण देकर लोगों को भड़काने का प्रयास करने के चलते दो मामले दर्ज किये गए है. इसी के साथ पुलिस ने बीजेपी विधायक के बेटे और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ चुके युवा बीजेपी नेता गौरव सिंह पर भी मामला दर्ज किया है. इसके आलवा बीजेपी विधायक का समर्थन करने वाले ३२ नामजद और करीबन १५० अज्ञात लोगों पर भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. इस मामले को लेकर पुलिस निरीक्षक देवेन्द्र कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ हंगामा करने, बदला, जान से मारने की धमकी, लाईसेंसी असलहे को लहराने इसके आलवा सरकारी काम में बाधा डालना, शांति व्यवस्था बिगाड़ने, द#गां भड़काने जैसे कई गंभीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है.

ग्रामीणों का कहना है कि मुहर्रम के जुलूस के दौरान कुछ उन्मादी दंगा फैलाने का प्रयास कर रहे थे, जिसका उन्होंने विरोध किया तो झगड़ा शुरू कर दिया तथा जानबूझकर हिन्दू समाज के लोगों को उकसाया जाने लगा. ग्रामीणों का कहना है कि सूचना पर विधायक जी पहुंचे तो एक बार पुनः हंगामा खडा कर दिया तथा पुलिस में शिकायत करा दी कि विधायक दंगा फैलाना चाहते थे. इसके बाद पुलिस ने विधायक के खिलाफ उनकी ही सरकार शासित पुलिस ने कार्यवाही शुरू कर दी. पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद विधायक के घर छापेमारी भी की जिससे राजधानी लखनऊ और दिल्ली तक हडकंप मच गया. बता दें कि इससे पहले श्रावण मास में बरेली में उन्मादियों ने कांवड़ यात्रा को निकलने नहीं दिया था तथा मुहर्रम के दिन जबरदस्ती ताजिया जुलूस निकालना चाहते थे, जिसके बाद ये स्थिति पैदा हुई.

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