“अधिकारीयों की मौज होती है और गरीब जनता पिसती है” अब इसको कम से कम योगीराज में कोई नहीं कह पायेगा. अधिकारियो के खर्चे में भारी कटौती

अक्सर कई लोगों को शिकयत हुआ करती थी कि अधिकारियो के अधिकार असीमित हैं और उनके खर्चे सभी सरकार की तरफ से शाही होते हैं लेकिन अब कम से कम योगी आदित्यनाथ को ये आरोप नहीं झेलना होगा .. एक नये आदेश में आख़िरकार अधिकारियो के तमाम खर्चों में भारी कटौती कर दी गयी है जिस से राज्य सरकार के सरकारी खर्च का बोझ काफी कम होगा . इस आदेश के बाद अब ये भी माना जा रहा है कि VVIP कल्चर नेताओं ही नहीं अधिकारयो से भी खत्म होता दिखेगा .

ज्ञात हो कि रामराज्य की तरफ बढ़ते कदम में आख़िरकार उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश वासियों के मेहनत से कमाए गये पैसे पर दिए गये टैक्स से प्राप्त होने वाले राजकोषीय खजाने से सरकारी अधिकारियो के कार्यो में होने वाले खर्च में कटौती की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने अनुपयोगी पदों को समाप्त करने और सरकारी खर्चो में कटौती को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव उन्होंने कहा है कि कई विभागों के कार्यभार में भी कमी आई है। ऐसे में बदले परिवेश में अनुपयोगी पदों को चिह्न्ति कर समाप्त किया जाएं और ऐसे पदों पर कार्यरत कर्मियों को अन्य पदों या अन्य विभागों में समायोजित करने की कार्यवाही प्राथमिकता के साथ की जाए। मुख्य सचिव का यह आदेश सरकारी विभागों व कार्यालयों के साथ-साथ समस्त सार्वजनिक उपक्रमों, स्थानीय निकायों, स्वायत्तशासी संस्थाओं व प्राधिकरणों पर समान रूप से लागू होगा

इन आदेशो को जारी करने के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनूप चंद्र पांडेय ने इस संबंध में एक विस्तृत शासनादेश जारी किया है। उन्होंने समस्त अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों व कार्यालयाध्यक्षों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि चिकित्सा व पुलिस विभाग को छोड़कर अन्य विभागों में नए पद स्वीकार न किए जाएं। चतुर्थ श्रेणी के रिक्त हो रहे पदों पर नियमित नियुक्ति न करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने पांच सितारा होटल में राजकीय भोज आयोजित न करने, सम्मेलन, सेमिनार व कार्यशालाएं होटलों की जगह सरकारी भवनों में करने, सरकारी काम के लिए हवाई यात्रा इकॉनमी क्लास में ही करने को कहा है। पांडेय ने कहा है कि प्रदेश के संशाधनों का अधिकतम उपयोग विकास कार्यो में करने के लिए प्रशासनिक खचोर्ं में कमी लाया जाना जरूरी है। इसके लिए शासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जिसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए..

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