कुंभ ने आने वाले साधू संतों के लिए चौड़ी हो रही थी सड़क और उसके बीच में पड़ रही थी नेहरू की मूर्ति.. लेकिन शुरू हो गया कांग्रेसियो का हंगामा

ये सडक उस राह पर थी जिस से हर साल माघ मेले में और बीच बीच में पड़ने वाले कुम्भ मेले में शामिल होने के लिए करोड़ों साधू संत और धार्मिक लोग जाया करते थे.. वहां भारी जाम लगता था क्योकि सडक उतनी चौड़ी नहीं थी जितनी जरूरी थी . असल में उस राह में पड़ती थी जवाहर लाल नेहरु की वो मूर्ति जो हटाने का साहस 1995 से आज तक कोई सरकार नहीं कर पाई थी . लेकिन योगी सरकार के लिए उन करोड़ों लोगों की भावनाएं और उनके सुगम दर्शन की व्यवस्था आदि प्रमुख प्राथमिकता थी और उसके चलते ही उन्होंने उठाया वो कदम जिस से तिलमिला उठे हैं कांग्रेसी और लगा रहे हैं तमाम आरोप …

विदित हो कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में कुम्भ यात्रियों के मार्ग में पड़ने वाली नेहरू की मूर्ति को क्रेन के जरिये हटाए जाने पर प्रयाग क्षेत्र के कांग्रेसियों ने जमकर हंगामा काटा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कुम्भ यात्रियों की सुविधा से ज्यादा जवाहर लाल नेहरु की मूर्ति को प्राथमिकता देते हुए इस मूर्ति को हटाने का प्रबल विरोध किया और इसको योगी सरकार की तानाशाही बताया है . बताते चलें कि जवाहर लाल नेहरू की मूर्ति उनके पैतृक आवास आनंद भवन के बाहर लगी हुई है। ध्यान देने योग्य है कि इलाहाबाद में कुंभ के लिए इन दिनों शहर में सड़क चौड़ीकरण सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है।

इलाहाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा इसी क्रम में बालसन चौराहे का भी सुंदरीकरण कराया जा रहा है। जिसके तहत गुरुवार को जवाहरलाल नेहरु की मूर्ति को क्रेन से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाने लगा। नेहरू की मूर्ति को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर कांग्रेस नाराज हो गए। कांग्रेसियों मूर्ति शिफ्ट करने का विरोध किया और जमकर हंगामे काटा। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने क्रेन को रोककर योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उस पर बदले की भावना और भेदभाव के साथ काम करने का आरोप लगाया। इस मामले में अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को दरकिनार करते हुए इलाहाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से बताया गया कि बालसन चौराहे पर सुंदरीकरण का कार्य कराया जा रहा है और इसके लिए पूरा नक्शा व डीपीआर तैयार किया गया है। उसी के तहत काम हो रहा है।

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