आतंकियों की लाश की घसीटता देख कर उबल पड़ा विपक्ष… भारतीय सेना पर कार्यवाई की हो रही मांग.. देश के जनता देख रही खामोशी से

अपनी जान पर खेलकर हिंदुस्तान तथा हिन्दुस्तानियों की रक्षा करने वाली भारतीय सेना को एक बार पुनः चुनौती मिली है तथाकथित सेक्यूलर भारतीय राजनीति से, जिसने मांग की है भारतीय सेना पर कार्यवाई करने की क्योंकि भारतीय सेना ने देश के दुशमन आतंकियों के शव को घसीटा था. विपक्षी राजनैतिक दलों का कहना है कि भारतीय सेना ने आतंकियों के शव को शव को घसीटकर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है. आश्चर्य होता है कि जो आतंकी भारत के टुकड़े करने का मंसूबा पाले बैठे हैं, जो आतंकी भारतीय सेना के खून के प्यासे बैठे हैं, उन आतंकियों के शव को सेना द्वारा घसीटा गया तो मानवाधिकार का उल्लंघन हो गया लेकिन वहीं जब सेना के जवानों पर उन्मादी लोग पत्थर फेंकते हैं, उस समय न तो ये विपक्ष कुछ बोलता है और न ही ये मानवाधिकार के ठेकेदार कुछ बोलते हैं. यहाँ देश की तरफ से सवाल खड़ा होता है कि सेना के जवानों का कोई मानवाधिकार क्यों नहीं होता?

बता दें कि झज्जर कोटली में मारे गए आतंकियों के शव को भारतीय सेना द्वारा घसीटकर ले जाने का फोटो सामने आया था जिस पर विपक्षी राजनैतिक दल तथा तथाकथित मानवाधिकारी भड़क उठे.कांग्रेस पार्टी के नेता राशिद अल्वी ने कहा कि जिस आतंकी को गोली मार दी उसका तो अंजाम हो गया उसे तो सजा मिल गई वहां तो फुलस्टॉप लग जाता है. अब तो वह सिर्फ लाश रह गया है उसके साथ कुछ करेंगे तो तकलीफ उसे नहीं होगी उसके घर के लोगों को तकलीफ होगी. वहीं मह्बूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी का कहना है कि कानून का तकाजा अपील का तकाजा और इंसानियत का यह तकाजा है कि कोई मर गया तो उसके बाद उसे घसीटना उस को तकलीफ देना जहालत है और इंसानियत के खिलाफ है मुझे लगता है ऐसा नहीं होना चाहिए. NC नेता अली मोहम्मद सागर ने कहा कि यह ठीक नहीं है, अच्छा नहीं है… जब इंसान इस दुनिया से जाता है तो फिर उसके साथ ऐसा करना अच्छी बात नहीं है. मरने के बाद फिर चाहे दुश्मन ही क्यों ना हो उसका भी आदर किया जाना चाहिए, हर मजहब यही सिखाता है.

सेना की कार्यवाई पर सवाल उठाने के बाद सेना की तरफ से भी जवाब दिया गया है. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी एक मिशन लेकर आते हैं. वह यहां मरने के लिए ही आते हैं, ऐसे में वह अपने शरीर पर कई बार विस्फोटक लगाए रहते हैं. पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिसमें आतंकियों के शव को उठाए जाने के दौरान विस्फोट हो गया. इसमें सेना को जानी नुकसान उठाना पड़ा है. बताया कि ऐेसे में आतंकियों के शव को उठाने के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. एक तो उसके शव को काफी देर तक छोड़ दिया जाता है. दूसरा 30-40 फीट की सुरक्षित दूरी से रस्सी के सहारे शव को उठाया जाता है. इसमें भी उसे पेट के बल ही लिटाकर खींचा जाता है. सेना के अधिकारी ने कहा कि वह आपने जवानों की जान को जोखिम में नहीं डाल सकते हैं.

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