वो कौन है जिसको पसंद नहीं आया ममता के विधायक का माँ सरस्वती की पूजा करना ? दुश्मनी विधायक से या माँ सरस्वती से ?

वो कौन है जिसको रास नहीं आया ममता बनर्जी के विधायक का माँ सरस्वती के आगे सर झुकाना . आखिर क्या गलत किया उन्होंने माता सरस्वती की पूजा कर के एक धर्मनिरपेक्ष शासिका ममता बनर्जी के शासन काल में जो उनको गोलियों से भून दिया गया . पश्चिम बंगाल जहाँ एक तरफ सियासी घमासान का केंद्र बना हुआ है तो वहीँ अब इस घमासान ने ले लिया है खून भरा मोड़ जिसमे कई भाजपा नेताओं के बाद अब नम्बर लगा है खुद एक विधायक का . हिन्दू तीज त्योहारों पर अलर्ट की चेतावनी और ब्लास्ट अदि की धमकियां आज से पहले भी मजहबी चरमपंथियों द्वारा दी जाती रही है . यहाँ तक कि सुदर्शन न्यूज के खुलासे में ये भी साबित हुआ था कि मन्दिरों के प्रसाद तक में जहर मिलाया गया था जिस से कई भक्त एक साथ मौत के मुह में भेजे जा सकें .

ये विधायक सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के थे और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबियों में से . इनकी हत्या ठीक उस समय की गयी जब एक पूरे धार्मिक रंग में हिन्दू समाज के साथ मिल कर माता सरस्वती की पूजा कर के वापस हो रहे थे . इनके ऊपर ताबड़तोड़ ऐसे गोलियां बरसाई गयी जैसे वो रंजिश सियासी न हो कर कोई व्यक्तिगत या उन्मादी भावना से प्रेरति रही हो . आख़िरकार उसी रंजिश के चलते ही उनके प्राण पखेरू उड़ गये और उन्हें अस्पताल तक ले जाने से पहले ही उन्होंने प्राण त्याग दिए .

बिस्वास रात करीब 8 बजे माजिया-फुलबाड़ी इलाके में सरस्वती पूजा समारोह में हिस्सा ले रहे थे. सत्यजीत बिस्वास सरस्वती पूजा का उद्घाटन करने के बाद मंच से नीचे उतरकर अपनी कार की ओर जा रहे थे. इस दौरान अचानक से कई बदमाश कहीं से बाहर आए और उन पर गोलीबारी शुरू कर दी.यहाँ पर एक सवाल जरूर बनता है कि हमलावरों की असल दुश्मनी किस से थी ? उनकी दुश्मनी तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत बिस्वास से थी या माँ सरस्वती से .. सत्यजीत बिस्वास वैसे भी VVIP कल्चर से बहुत दूर सामान्य नागरिको के बीच सामान्य रूप से रहते थे. यहाँ ये भी ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम बंगाल के बारे में जगजाहिर है कि वो अवैध बंगलादेशियो और रोहिंग्या आदि के रहने के लिए अक्सर चर्चा में रहता है जो चरमपंथी सोच के होते हैं .

ऐसे में उनकी हत्या का स्थल और समय तब चुनना जब को एक बड़े हिन्दू समुदाय के साथ माता सरस्वती के पावन दिन पर उनकी आराधना कर रहे हों , कही न कहीं तमाम प्रकार के संदेह पैदा कर रहा है . सत्यजीत बिस्वास से पहले भी तमाम बड़े लोगों की हत्या आदि की कोशिश तब की गयी थी जब वो मन्दिर या पूजा आदि के लिए जा रहे हों . ऐसे में सवाल बनता है कि सत्यजीत बिस्वास राजनैतिक दुश्मनी का शिकार हुए हैं या किसी उस सोच का जो भारत ही नहीं दुनिया में किसी और धर्म के अस्तित्व पर विश्वास ही नहीं करती है और दूसरे देवी देवताओं को देखते ही उग्र हो जाया करती है . फिलहाल उपरोक्त विषय जांच के हैं और आशा है कि दिवंगत सत्यजीत बिस्वास के असल हत्यारे जल्द ही गिरफ्त में होंगे .

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