कभी बनाते थे पंचर, आज शामिल हो रहे भारत भाग्य विधाताओं की टीम में. एक सांसद ऐसा भी

भले ही किसी की बातें IRS अधिकारी होने के बाद राजनीति में आने की मसालेदार रूप में बना कर प्रचारित की जाती हों , भले ही बचपन से विदेश में ही पले बढ़े लोगों को झूठा महान बना और बता कर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के प्रयास किये जाते हों पर संघर्ष और मश्किल हालातों का सामना कर के सफलता किसे मिलना कहते हैं इसके जीवंत प्रमाण केवल मोदी सरकार में ही मिल सकते हैं ..

जिस मंत्रिमंडल का सेनापति नरेंद्र मोदी खुद ही संघर्ष की जीती जागती पराकष्ठा जो चाय वाले से भारत का प्रधानमंत्री बन जाता है उसी कैबिनेट में अब शामिल होने जा रहे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक जी कभी अपने पिता के साथ एक छोटी सी दूकान में साइकिल के पंक्चर बनाया करते थे. अपना बचपन बेहद गरीबी में बिताया ये सांसद अब भारत भाग्यविधाताओं की टीम में शामिल होगा . वहां की जनता के ही अनुसार वे आज भी बजाज के पुराने हरे रंग के स्कूटर पर अपने शहर की गलियों में सफर करते है ..दलित समुदाय से आने वाले 63 साल के वीरेंद्र कुमार संघ, विहिप और भाजपा के विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. उन्होंने 1996 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता था और इसके बाद अगले तीन लोकसभा चुनाव में भी सागर से जीत हासिल की.. 
अपनी दूकान से ही अपने आप को एक बड़े नेता के रूप में शामिल कर चुके इस सांसद के बारे में वहां की जनता अथाह प्रेम रखती है इसलिए जमीन से जुड़े इस नेता के इलाके में किसी और लोक लुभावन वादों वालों की लाख कोशिशों के बाद भी दाल नहीं गली … लोकसभा सीट के नए परिसीमन के बाद वे टीकमगढ़ से चुनाव जीते. पिता से पंक्चर बनाना सीखने के बाद उन्होंने दुकान की जिम्मेदारी भी संभालना शुरू कर दिया. इस दौरान वे पढ़ाई भी कर रहे थे. उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए और चाइल्ड लेबर में पीएचडी किया. जय प्रकाश जी के आंदोलन के दौरान वीरेंद्र 16 महीने जेल में भी रहे थे. वे कुल 6 बार लोकसभा का चुनाव जीते हैं. संसद की स्टैंडिंग कमेटी के भी वे सदस्य हैं. 
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