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#SCST पर सरकार विरोधी आन्दोलन के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर पूंछा एक तीखा सवाल जिसका जवाब देना है मोदी सरकार को

देश में SCST एक्ट को लेकर घमासान मचा हुआ है तथा इस एक्ट के विरोध में सवर्ण तथा ओबीसी समाज सड़कों पर हैं. एक्ट के विरोध में 6 सितंबर को सवर्ण संगठनों की तरफ से भारत बंद किया गया जिसमें ओबीसी समाज ने भी समर्थन दिया. SCST एक्ट पर सरकार विरोधी आन्दोलन के बाद मोदी सरकार जब तक कुछ समझ पाती तब तक सरकार पर दूसरा प्रहार हुआ है.  एससी-एसटी संशोधन कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते जवाब मांगा है. जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न कानून के अमल पर रोक लगाई जाए.

दरअसल, दो वकील-प्रिया शर्मा, पृथ्वी राज चौहान और एक NGO ने जनहित याचिका दायर कर सरकार के संशोधन कानून को चुनौती दी है. याचिका में एससी-एसटी एक्ट पर तत्काल गिरफ्तारी पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के केंद्र सरकार के एससी-एसटी संशोधन कानून 2018 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट के दो वकील प्रिया शर्मा, पृथ्वी राज चौहान और एक NGO ने जनहित याचिका दायर कर सरकार के संशोधन कानून को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि सरकार का नया कानून असंवैधानिक है क्योंकि सरकार ने सेक्‍शन 18 ए के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाया है जोकि गलत है और सरकार के इस नए कानून आने से अब बेगुनाह लोगों को फिर से फंसाया जाएगा.

याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के नए कानून को असंवैधानिक करार दे और जब तक ये याचिका लंबित रहे, तब तक कोर्ट नए कानून के अमल पर रोक लगाए. आपको बता दें कि राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी करने वाले एससी एसटी संशोधन कानून 2018 को मंजूरी दी थी. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद एससी एसटी कानून पूर्व की तरह सख्त प्रावधानों से लैस हो गया है.  सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कानून के अमल पर रोक लगाने की मांग की, जिस पर पीठ ने कहा कि बिना सरकार का पक्ष सुने बिना कानून के अमल पर रोक नहीं लगाई जा सकती लेकिन वह सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि क्यों न इस बिल पर रोक लगा दी जाए.

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