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प्रभु श्रीराम के सम्मान पर वसीम रिज़वी से नाराज हुए इस्लामिक जानकार… श्रीराम का भक्त बता इस्लाम से किये गये खारिज

धर्मनिरपेक्षता का आलम हिंदुस्तान में क्या है इसका गवाह बने हैं शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैय्यद वसीम रिजवी, जिन्हें इस्लाम से सिर्फ इसलिए खारिज कर दिया है क्योंकि वह प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को स्वीकारते थे, श्रीरामभक्त थे. तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोग कहते हैं कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन जब कोई मुसलमान मंदिर की बात करता है, श्रीराम को मानता है तो उस समय धर्मनिरपेक्षता को किनारे रखकर मजहबी कानून याद आ जाता है तथा रामभक्त होने की वजह से वसीम रिजवी को इस्लाम से खारिज कर दिया जाता है. आखिर ये कौन सी धर्मनिरपेक्षता है जो रामभक्त होने से मुस्लिम को इस्लाम से खारिज कर देती है ?

 शुक्रवर को लखनऊ में जुमे की नमाज के दौरान शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा वसीम रिजवी अयोध्या में राम मंदिर का समर्थन कर रहे हैं तथा शियाओं के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्ला अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी के फतवे को अस्वीकार कर रहे हैं इसलिए शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को इस्लाम से खारिज कर दिया गया है. बता दें कि शियाओं के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्ला अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के खिलाफ वसीम रिजवी को फतवा दिया था कि मस्जिद की जगह पर मस्जिद ही बनेगी, मंदिर नहीं. लेकिन वसीम रिजवी ने इस फतवे को खारिज कर दिया था तथा कहा था कि अयोध्या में मंदिर ही बनेगा. इसके बाद शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने वसीम रिजवी को इस्लाम से खारिज कर दिया.

कालवे जव्वाद ने इस दौरान योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा तथा सपा छोड़ बीजेपी का दामन थमने वाले बुक्कल नवाब  पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि मंदिरों में जाकर सियासी फायदे के लिए ऐसे लोग घंटा बजा रहे हैं और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं. इन लोगों की वजह से शियाओं का मजाक उड़ रहा है. कल्बे जव्वाद ने कहा कि मस्जिद की जगह पर सिर्फ मस्जिद ही बन सकती है. उन्होंने कहा कि वसीम रिजवी खुद को गिरफ्तारी से बचाने के लिए ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं. बता दें, वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज भूमि देने का प्रस्ताव दिया है. रिजवी का दावा है कि बाबरी मस्जिद शिया शासक द्वारा बनवाई गई थी और यह वक्फ की संपत्ति है, जिसे वह राम मंदिर के लिए दान देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है और शिया वक्फ बोर्ड देश और समाज के विकास को लेकर संजीदा है. हिन्दुओं को उनका हक मिलना चाहिए और मुस्लिमों को दूसरों के हक छिनने से दूर रहना चाहिए. शिया वक्फ बोर्ड अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगा, चाहे फिर दुनिया के सभी मुसलमान हमारे विरोध में क्यों न खड़े हो जाएं.

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