जिन नोबेल पुरस्कार विजेताओं को कभी घोषित किया जा रहा था संघ विरोधी… अब वही नजर आने वाले हैं संघ के मंच पर

देश के तमाम तथाकथित बुद्धिजीवी तथा राजनेता हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अक्सर आलोचना करते रहते हैं. लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि संघ की जितनी आलोचना की जाती है संघ उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ता जाता है. संघ को लेकर ये भी खबरें सामने आयी कि नोबेल पुरस्कार पुरस्कार विजेता लोग संघ विरोधी है. लेकिन संघ के इन आलोचकों को जवाब मिलने वाला है जब नोबेल पुरस्कार हिन्दुस्तानी संघ के मंच पर नजर आने वाला है. आपको बता दें कि बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के इस साल के विजयादशमी समारोह के मुख्य अतिथि होंगे. यह समारोह 18 अक्टूबर को होगा.

ज्ञात हो कि यह आरएसएस का सबसे महत्वपूर्ण सालाना आयोजन होता है. इस समारोह में आरएसएस प्रमुख स्वयंसेवकों को संबोधित करते हैं. वे इस दौरान विभिन्न प्रासंगिक मसलों पर संगठन के विचार रखते हैं और अगले साल के लिए अपना एजेंडा पेश करते हैं. खबर के मुताबिक कैलाश सत्यार्थी की टीम ने इस बात की पुष्ट‍ि की है कि वे विजयादशमी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नागपुर जाएंगे. इस बार भी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत इस कार्यक्रम में संभवत: मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के बारे में बात करेंगे और उसमें संगठन की क्या भूमिका हो सकती है, इस पर चर्चा करेंगे.

पिछले साल इस कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख ने कश्मीर, गोरक्षा और सरकार की नीतियों पर बात की थी. उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक के लिए मोदी सरकार की तारीफ भी की थी. कैलाश सत्यार्थी बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक हैं, जो बालश्रम को खत्म करने और बच्चों के पुनर्वास के लिए काम करता है. उन्हें इस सामाजिक कार्य के लिए साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है. आरएसएस के विचारों वाले साप्ताहिक पॉन्चजन्य को साल 2015 में दिए एक इंटरव्यू में सत्यार्थी ने कहा था कि भारत के कई एनजीओ ‘नक्सलवाद से प्रभावित हैं और यह देश की सुरक्षा के लिए अच्छी बात नहीं है.’  कैलाश सत्यार्थी से पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा तथा रतन टाटा भी संघ के कार्यक्रम में शामिल चुके हैं.

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