नक्सलियों का समर्थन, आतंकियों की पैरवी, पुलिस वालों को ठुल्ला के बाद अब महिलाओं को प्रताड़ना बन चुकी है आप पार्टी की पहिचान..कभी “वन्देमातरम” बोल कर आये थे सत्ता में

बहुत पुरानी बात नही है , काफी लोगों को याद होंगे वो नारे जब “अजी हम तो साफ सुथरी राजनीति करने आये हैं” या “हम राजनीति बदलने आये हैं” आदि बोला जाता था .. उस समय मंच की शुरुआत अन्ना हजारे जी से होती थी जब वन्देमातरम , भारत माता की जय आदि के नारों से भीड़ झूम जाया करती थी .. सबने सोचा कि कुछ तो बदलाव कर सकता है ये समूह औऱ लोग जुड़ते चले गए .  यहां याद रहे की भारत माता की जय या वन्देमातरम के नारों से किस वर्ग, सोच , मानसिकता या विचारधारा के लोग इस दल से जुड़े होंगे इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है ..और इसी वर्ग ने दिला दी सत्ता भारत की राजधानी दिल्ली की उस अरविंद केजरीवाल एन्ड टीम को जिसका असली रूप व रंग अभी सामने आना बाकी था और वो आ ही गया ..

कुछ समय बाद ही वन्देमातरम बोलने वालों को वही शब्द साम्प्रदायिक लगने लगा और वही कहने लगे कि इसको बोलने के लिए किसी को बाध्य न किया जाय .. अब बारी थी भारत माता की जय के नारों की, जिसके जवाब में दिल्ली की ही एक यूनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाए गए..उनके समर्थन में देखा गया केजरीवाल एन्ड टीम के कुछ सदस्यों को .. इतना ही नहीं, अवैध बंगलादेशी व घुसपैठी रोहिंग्या के लिए इन्ही के आधार में रहे लोगों को अदालतों में मुकदमे आदि लड़ते देखे आम जनता ने .. ये वेटिकन तक श्रद्धा से चले गये थे लेकिन काशी गए तो मात्र मोदी के विरोध में चुनाव लड़ने ..खुद बता कर आये थे कि दिल्ली की जनता गरीब है और वो उसकी गरीबी दूर केरेगें लेकिन उसी जनता से ये लगातार चंदा मांगते और लेते भी रहे ..

इसी बीच इन्होंने 2 नेताओं को सबसे ज्यादा प्रोत्साहित किया ..पहले अमानतुल्लाह खान और दूसरे सोमनाथ भारती .. एक का प्रयोग अपनी पार्टी के बागियों व केजरीवाल की हां में हाँ न मिलाने वालों को मारने पीटने के लिए व दूसरे को छोड़ दिया गया महिलाओं को प्रताड़ित करने के लिए ..आम आदमी पार्टी के जिस भी पूर्व नेता को बेइज्जत किया गया उसमें अमानतुल्लाह का नाम जरूर आया और घर की महिला हो या न्यूज की एंकर उसके खिलाफ प्रताड़ना में सोमनाथ भारती सबसे अव्वल रहे .. फिर भी ये दोनों केजरीवाल की आंखों के तारे बने रहे ..इसी के साथ विदेशी मामलो में भी भारत सरकार की बेइज्जती करवाना जिसमे सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगना और सेना को अपमानित करने की कोशिश करना, पुलिस की अथक कोशिशों से पकड़े गए शहरी नक्सलियों को परोक्ष रूप से सही बताना, खालिस्तानियों के घर पर रुकना , कश्मीरी पत्थरबाजों के खिलाफ खामोश रहना, बटला हाउस के मुठभेड़ पर सवाल उठाना आदि ऐसे मामले सामने आए जिस से लगा कि ये राजनीति नही बल्कि राष्ट्र की ही नीति तो बदलने की कोशिश नही कर रहे ? ध्यान ये भी रखने योग्य है कि इसी बीच ये बलिदानी व समाज के रक्षक पुलिस वालों को ठुल्ला आदि अपमानजनक शब्द बोलते रहे .. हर कोई जानने की कोशिश कर रहा कि ये कैसी राजनीति ? और इस से देश का क्या भला होगा ?

Share This Post

Leave a Reply