आतंकियों की तरह बनाया था मास्टर प्लान…. और मजबूरन कोर्ट को छोड़ना पड़ता बलात्कारी गुरमीत को

गुरमीत को कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है। सजा से पहले बहुत कुछ हुआ जिसने हरियाणा को हिला कर रख दिया। जिसने खट्टर की नींद हराम कर दी, जिसने लोकतंत्र को चैलेंज किया, जिसने कानून को नको चन्ने चबवा दिये, जिसमे लगभग 33 लोगों की जान चली गई। जो हुआ बुरा हुआ, जो हुआ उसकी आग ने दिल्ली तक को झुलसाया। जो अब खुलासे हो रहे वो चौकाने वाले है। पैसा बोलता है ये गुरमीत के मामले में भी दिखा जैसे बाकी पैसो वाले के मामले में देखने को मिलता है।

जो हुआ उसमे ये भी दिखा की कैसे जरुरत से ज्यादा भक्ति अंधा कर देती है। जो हुआ उसमे कौन लोग शामिल थे, हां 1000 रुपये हर दिन पर जरूर गुंडों को बुलाया था गुरमीत ने पर सवाल ये है की सबको तो पैसे पर नहीं बुलाया था इतनी भीड़ जो आई थी उन सब को पैसा देना मुमकिन भी नहीं है। तो सवाल ये है की वो कौन लोग थे जो इतने अंधे हो गए थे की अपने घर-परिवार को भूल गए, वो कौन लोग थे जो जमीन जायदाद को छोड़ इस बलात्कारी बाबा के लिए खड़े हो गए?
सवाल ये है की मीडिया में वो जो महिला चिल्ला रही थी टीवी पर और धमकिया दे रही थी की ‘बाबा को अगर सजा हुई तो हम सब यही जान दे देंगे’ बाबा ने ऐसा कौन सा एहसान उनपर कर दिया था की वो महिला मरने तक को तैयार थी? इतनी भीड़ तो दिल्ली में उस वक़्त भी नहीं दिखी थी जब निर्भया से हुए बलात्कार के ऊपर इन्साफ मांगा जा रहा था? ये कौन लोग थे और क्यों इनको गुरमीत में एक बलात्कारी नहीं दिख रहा था ,क्यों उनको बलात्कार का दोषी करार दिया गया गुरमीत उनके दुखो का हरण करने वाला भगवान दिख रहा था? ये भक्त कैसे अंध भक्त बन गए?
जिहाद के नाम पर खुद को उड़ाते हुए व्यक्ति आपने फिल्मों में देखा होगा ,या फिर बहुत सी ऐसी खबरे पढ़ी होंगी जिसमे आपने पढ़ा होगा की फलाने ने जिहाद के नाम पर ,इस्लाम के नाम पर अपने आप को मानव बम्ब बना लिया और बहुत से लोगो की जान खुद को उड़ा कर लिया। खुद को तबाह करने का दो ही वक़्त में ख्याल आता है, या तो आप किसी से हद से ज्यादा मोहब्बत करते हो उसपर विश्वास करते हो या फिर किसी से बहुत ज्यादा नफ़रत करते हो। विश्वास ऐसा की उसका हर कहा आपको सच लगता हो और नफ़रत ऐसा की उसको ख़त्म करने की चाहत में खुद को भी ख़त्म कर सकते हो।
ठीक इसी तरह का माइंड वॉश करते है लोगो से गलत काम को अंजाम कराने वाले। लोगो के दिमाग को हर उस तरीके से राजी करते है की वो व्यक्ति जो कहे वही सत्य मान लिया जाए। आतंकवादी इसका इस्तेमाल खूब करते है। आतंकवादी उन लोगो को पकड़ते है जिनकी मानसिक क्षमता कमजोर होती है ,मानसिक क्षमता कमजोर का मतलब ये नहीं की पागल व्यक्ति, बल्कि इमोशनली कमजोर जिसका माइंड वॉश किया जा सके फिर उनका हर तरीके से माइंड वॉश करना चालू करते है। उन्हें हर वो चीज़ दिखाते है जिसमे मुसलमानो के खिलाफ बाते होती है ,विडिओ ,पिक्चर के सहारे,जिसमे मुसलमानो पर अत्याचार हो रहा हो, वो नफ़रत भरते है उनके दिमाग में फिर उनको अल्लाह को खुश करने के तौर तरीके बताते है।
उनको बताते है की आप जो काम कर रहे है उससे अल्लाह खुश होगा और फिर उनको जिहाद के नाम पर लोगो का कत्लेआम करने भेज देते है। यानी की वो मानसिक कमजोर व्यक्ति अपने आप को इस्लाम का रखवाला समझता है और काफिरो को इस्लाम का दुश्मन और फिर काफिरो को मारने में भी नहीं संकोचता और अपने आप को हीरो समझ कर कुर्बान करने से भी नहीं गुरेजता। जिसके बाद कत्लेआम होता है जिसका जीता जागता सुबूत आप सब है। ब्लू व्हेल गेम जो इस वक़्त चर्चा में है। इस गेम को बनाने वाले का कहना है की वो इस दुनिया में कमजोर मानसिकता वालो को देखना नहीं चाहता और इस गेम से कमजोर मानसिकता वाले ही आगे चल कर इस का शिकार हो जाते है।
यानि की इस गेम के तौर तरीके इमोशनल कमजोर लोगो का माइंड वाश करके उनको सुसाइड करने पर मजबूर करता है। इस गेम को खेलने वाले हर उस व्यक्ति को मजबूर किया जाता है जिसके बाद वो अपनी स्वेच्छा से अपनी जान दे देता है। ठीक इसी तरह का मामला गुरमीत के चाहने वालो का है। ये जो भीड़ थी उन्ही लोगो की थी जो घर परिवार से नाखुश थे,परेशान थे ,इनकी बाते वहाँ नहीं सुनी जाती जहाँ सुनी जानी चाहिए फिर ये बेचैन और परेशान रहते है जिसके बाद इनका रुख शांति पाने की तरफ मुड़ता है और आजकल की धारणा है की ये शांति सतसंगो और आश्रमों से गुजर कर मिलती है, फिर इनका रुख आश्रमों और बाबाओं की तरफ मुड़ता है।
वहां पहुंचने पर इन्हे तवोज्ज मिलती है जिसका इंसान भूखा है, वहाँ इनकी पूछ होती है, इज़्ज़त मिलती है। जिसके बाद समाज में सही स्थान न पाने वाले व्यक्ति का विश्वास और प्रेम अटल हो जाता है उस व्यक्ति के तरफ जिसकी वजह से उस व्यक्ति को इतना कुछ मिलता है। जब विश्वास अपनी जगह सुनिश्चित कर लेती है तब खेल शुरू होता है ढोंगियों का और उसके बाद फिर जो मर्ज़ी आये वो कराते है ये तथाकथित बाबा। गुरमीत भी इसी प्लान में था,गुरमीत ने अपने भक्तो को वो सारे तौर तरीके सिखाये थे जिससे की उसकी सजा को प्रभावित किया जा सके। विश्वास की पकड़ इतनी मजबूत बना रखी थी की वो भीड़ अपने भगवान को बचाने के लिए किसी भी हद तक गुजर सकती थी।
बाकी के आतंकवादी तो एक दो को सुसाइड करवाते है, ब्लू व्हेल गेम भी एक बार में एक को टारगेट कर उनसे सुसाइड करवाता है, पर गुरमीत का मास्टर प्लान मॉस सुसाइड का था। अचंभित न होये ऐसा होता है। मॉस सुसाइड में एक साथ बहुत से लोग एक ही तरह से खुद को एक साथ खत्म कर लेते है। अगर ऐसा होता तो कोर्ट के आगे 70000 से भी ज्यादा लोग एक साथ खुद को मार लेते और मजबूरन कोर्ट को बलात्कारी गुरमीत को छोड़ना पड़ता। बहरहाल,ऐसा हुआ नहीं वरना हरियाणा लाल होता अंध भक्तो के खून से और आज कहानी और परिदृश्य दोनों ही अलग होते। 
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