एक नहीं कई और मामले भी थे आलोक वर्मा के खिलाफ,, जो बने उनकी सीबीआई से विदाई का कारण

तमाम आरोप-प्रत्यारोप तथा जद्दोजहद के बाद आख़िरकार आलोक वर्मा की सीबीआई से विदाई हो गई जब सेलेक्ट कमेटी ने उनको सीबीआई के निदेशक पद से हटा दिया. आलोक वर्मा को आखिर सीबीआई से क्यों हटाया गया, इस पर चर्चा अभी भी जारी है. सूत्रों के मुताबिक, आलोक वर्मा की विदाई के पीछे उत्तर प्रदेश से जुड़े कई मामले भी थे. इसका जिक्र सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में भी किया है. इस रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सलेक्ट कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ के पद से हटाया था. इसके बाद आलोक वर्मा ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था.

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, सीवीसी की रिपोर्ट में आलोक वर्मा के लिए शिकायतों की एक लंबी लिस्ट तैयार की गई थी. इनमें कई मामले में यूपी से जुड़े थे. यूपी एटीएस के एएसपी राजेश साहनी की आत्महत्या के मामले को सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने हाथ में लेने से मना कर दिया था. इसके साथ ही बसपा कार्यकाल में हुए NRHM घोटाले में शामिल एक मंत्री को क्लीन चिट देने की कोशिश का भी मामला सामने आया है.

इसके अलावा यूपी कैडर के एक आईपीएस को सीबीआई में तैनाती की पुरजोर कोशिश, ईडी के एक असिस्टेंट डायरेक्टर एनबी सिंह को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार करने वाले सीबीआई अधिकारी को एक्सटेंशन न देने का मामला और फिर उसे मूल कैडर में वापस भेज देना, यूपी के ज्वाइंट डायरेक्टर को हटाकर उनकी जगह पर दिल्ली में तैनात शरद अग्रवाल को लाया जाना, सीबीआई के प्रवक्ता अभिषेक दयाल को भी हटाना समेत कई विवादित मामले शामिल हैं. सीवीसी रिपोर्ट में दावा किया गया कि आलोक वर्मा ने यूपी के कई मामलों में अपने पद का दुरुपयोग किया था. सलेक्ट कमेटी ने इसी रिपोर्ट के आधार पर आलोक वर्मा की विदाई तय की थी, जिसके बाद आलोक वर्मा ने इस्तीफा दुसरे विभाग में जॉइनिंग नहीं की तथा इस्तीफा दे दिया.

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