सना के हिसाब से सिर्फ पुलिस ही दोषी नहीं, बल्कि उसके अलावा कोई और भी है.. विवेक की मौत में.. लेकिन उसकी चर्चा कहीं क्यों नहीं ?

जिस मामले ने पिछले कुछ समय से प्रदेश ही नहीं पूरे देश की राजनीति में तूफ़ान मचा रखा है उस मामले में सबसे अहम गवाह सना के बयानों ने इस पूरे मामले को घुमा कर रख दिया है . विवेक की मौत पर उठ रहे आक्रोश के बीच खुद पुलिस वालों को भी मृतक विवेक के परिवार से हमदर्दी है भले ही उन्हें मीडिया का एक वर्ग किसी भी रूप में क्यों न दिखा रहा हो जनता के आगे .. असल में कहा जाय तो उन्हें इसकी आदत जैसी हो गयी है . . इस मामले में पहले सना द्वारा दी गयी तहरीर सामने आई है जिसमे उन्होंने गोली चलाने वाले को एक प्रकार से अज्ञात में रखा है लेकिन अगर उनके पूरे बयान को देखा जाय तो सिर्फ पुलिस ही नहीं बल्कि कोई और भी है विवेक की मौत में दोषी पर उस बयान पर ध्यान नहीं दिया गया . यद्दपि सना की तहरीर, फिर सना का मीडिया में दिया गया बयान और उसके बाद CCTV में आई तस्वीर इतना तो जरूर बता रही है कि सना सब सही नहीं बोल रही और कहीं न कहीं उनकी बताई जा रही बातों में कुछ झोल जरूर है . यद्दपि इस मामले में दोषी बना व्यक्ति इतना सक्षम नहीं कि वो सना की उस प्रकार से जांच के लिए आवाज उठा सके जैसे कभी आज न्याय मांग रहे विपक्ष ने साध्वी प्रज्ञा का करवाय था अन्यथा इतना तो तय था कि सारा और सच्चा सच जरूर बाहर निकल कर सामने आ गया होता जो पीड़ित और दोषी दोनों पक्षों के लिए न्यायहित में होता ..

विदित हो कि एक मीडिया चैनल को दिए गये साक्षात्कार में सना ने कहा है कि –  जब विवेक को गोली लगी तो उन्होंने पुलिस बुलाई और पुलिस ने आ कर विवेक को अस्पताल में भर्ती करवाया . लेकिन आगे के बयान में उन्होने अस्पताल के डाक्टरों पर भी सवाल उठाया है और उनके अनुसार विवेक का इलाज़ बेहद ही सामान्य रूप से किया जा रहा था . उनका इशारा सीधे सीधे डाक्टरों की तरफ था कि उन्होंने उस मामले में तन्मयता नहीं दिखाई थी . कुल मिला कर अगर सना के बयान को देखा जाय तो उनके हिसाब से पहले पुलिस की गोली और उसके बाद डाक्टरों की लापरवाही भी विवेक की मौत की वजह है .

इस पूरे बयान में लोहिया अस्पताल पूरी तरह से शामिल होना सामने आ रहा है .. सना के हिसाब से –  वो बार बार चिल्ला रही थी कि विवेक सर का इलाज़ करों लेकिन लोहिया अपस्ताल वाले उसकी एक भी बात नहीं सुन रहे थे . इतना ही नहीं , वहां पर विवेक को इलाज़ देने के बजाय उन्हें PGI तक ले जाने की बात की जा रही थी . सना के हिसाब से अगर देखा जाय तो उत्तर प्रदेश की पुलिस ही नहीं स्वास्थ्य विभाग भी इसमें दोषी है लेकिन तमाम कैमरे सिर्फ और सिर्फ पुलिस के आस पास घुमाने के पीछे और किसी के भी द्वारा लापरवाह डाक्टरों की एक भी बार चर्चा न करना कहीं न कई सवाल खड़े कर रहा है . इस पूरे मामले में अभी तक सिर्फ और सिर्फ पुलिस वालों से जवाब मांगने और लापरवाह डाक्टरों की एक भी शब्द चर्चा न करना कईयों को कई बातें सोचने पर मजबूर कर रहा है .

इस बीच मायावती जैसे नेत्रियो के ब्राह्मण के प्रताड़ित होने के बयान ने ये भी साबित करने की तरफ मजबूर किया है कि एक व्यक्ति के दुःख को भुना कर राजनीति की रोटी सेंकी जा रही है . कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि अपराधियों के खिलाफ आग उगल रही उत्तर प्रदेश की बन्दूकों को खामोश करने के लिए न्याय मांगते इस परिवार के दर्द से कोई वास्ता न रखने वालों ने इसमें अपने राजनैतिक स्वार्थ तलाशने शुरू कर दिए .. ऐसा माना जा रहा है कि विवेक की मौत के लापरवाह डाक्टरों की चर्चा कर के उनके उस उद्देश को भटकने का खतरा है जिसमे साधुओ के हत्यारों को मार गिराने वाली अलीगढ़ पुलिस तक के पराक्रम पर सवाल खड़े कर दिए गये थे . सवाल ये है कि जीवित विवेक के पहुचने के बाद लापरवाही दिखाने वाले डाक्टरों की चर्चा और उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग क्यों नहीं ? किसी भी एक बयान में , किसी के भी  ? … अगर सना सब सही बोल रही है तो उसका बयान सिर्फ पुलिस के लिए ही सही क्यों माना जा रहा .. दोनों सिपाहियों को बर्खास्त करते हुए फ़ौरन ही जेल भेजने वाले उत्तर प्रदेश शासन ने अब तक एक भी लापरवाह डाक्टर के खिलाफ एक भी कदम क्यों नहीं उठाया .. ?

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