क्या लिखा था “राकेश अस्थाना” की उस चिट्ठी में, जो bnee आलोक वर्मा की छुट्टी की मुख्य वजह

तमाम जद्दोजहद तथा रस्साकसी के बाद आखिरकार आलोक वर्मा की सीबीआई मुख्यालय से विदाई हो गई. विवादों के कारण छुट्टी पर भेजे गये आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया तो उनकी बहाली के 24 घंटे बाद ही सेलेक्ट कमेटी ने बहुमत से आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया गया. यहाँ ये जानना जरूरी है कि आखिर वो क्या बजह  रही, जिसके कारण वर्मा सीबीआई निदेशक के पद से हटाया गया. आपको बता दें कि रआलोक वर्मा की इस विदाई में सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की चिट्ठी मारक क्षमता का काम कर गई.

राकेश अस्थाना की इसी चिट्ठी के आधार पर पहले सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की और फिर वही रिपोर्ट प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमेटी, जिसके अन्य सदस्य जस्टिस सीकरी और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हैं, के सामने रखी गई. हालांकि इससे पहले वह रिपोर्ट सीवीसी ने सुप्रीम कोर्ट को भी बंद लिफाफे में दी थी। इसमें राकेश अस्थाना, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ था, ने 19 अक्तूबर को सीवीसी और कैबिनेट सचिव को लिखे अपने पत्र में वर्मा के खिलाफ कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने ऐसी ही चिट्ठी सितंबर माह में भी उक्त दोनों अधिकारियों के पास भेजा था.

जानते हैं कि क्या लिखा था राकेश अस्थाना की चिट्ठी में

स्पेशल डायरेक्टर (सीबीआई) राकेश अस्थाना ने अपनी चिट्ठी में लिखा, वर्मा मुझे फंसाने के लिए लंबे समय से चाल चल रहे हैं. मोईन कुरैसी मामले की आड़ में उन्होंने मेरे खिलाफ वडोदरा, सूरत और अहमदाबाद में रेड डलवाई. वर्मा ने अपने चहेते अफसरों को यह हिदायत दे रखी थी कि चाहे जैसे भी, अस्थाना के खिलाफ कुछ निकाल कर लाओ. आलोक वर्मा मेरा करियर नष्ट कर देना चाहते हैं. उन्हें यह भी अंदेशा है कि वे मुझे किसी झूठे केस में फंसवाने की तैयारी कर रहे हैं.

-मोईन कुरैशी मामले में जांच अधिकारी, एसआईटी के एसपी और ज्वाइंट डायरेक्टर ने सतीश बाबू सना की गिरफ़्तारी के लिए सिफारिश की थी. स्पेशल निदेशक अस्थाना ने भी इस फाइल पर अपनी मुहर लगाकर इसे 20 सितंबर को निदेशक आलोक वर्मा के पास भेज दिया। वर्मा ने सीबीआई के तय नियमों का उल्लंघन कर इस फाइल को कानूनी मामलों के निदेशक ओपी वर्मा के सुपुर्द कर दिया. उसमें वर्मा ने कुछ लाइनें भी लिखी, जिनका साफ मतलब था कि सतीश को गिरफ्तार न किया जाए.

-चिट्ठी में अस्थाना का आरोप है कि र्मा इन सात केसों में भी गलत इरादे से हस्तक्षेप कर रहे थे. इनमें संदेसरा ग्रुप आईटी अफिशल, संदेसरा ग्रुप बीएस-एफएस नई दिल्ली, उपेंद्र राय एवं अन्य, राकेश तिवारी एवं अन्य, दीपेश चांडक एवं अन्य, ईओ-2 शाखा के अज्ञात अधिकारी आदि मामले शामिल हैं. इसके साथ ही अस्थाना ने आलोक वर्मा, राजेश्वर सिंह व कई दूसरे अफसरों पर छवि खराब करने का आरोप भी लगाया.

-24 सितंबर को लिखे पत्र में अस्थाना ने कहा, मेरे खिलाफ चल रहे इस दुष्प्रचार के माहौल में मैं अपनी डयूटी पूरी नहीं कर सकता.

-अस्थाना ने चिट्ठी में लिखा है कि वर्मा ने बीएनआर होटल केस, जो कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दर्ज हुआ था, के मुख्य संदिग्ध को एफआईआर से बाहर करा दिया. खास बात है कि आरोपी का नाम एफआईआर में शामिल करने के लिए आईओ, एसपी, डीआईजी, जेडी और एडीशनल डायरेक्टर सीबीआई ने भी सिफारिश की थी.

-अस्थाना ने अपने पत्र में लिखा कि वर्मा ने सतीश बाबू को इस केस में राहत देने के लिए उससे दो करोड़ रुपये लिए हैं. बदले में उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई और पूछताछ में भी छूट मिल गई.
-सीबीआई निदेशक ने ईडी के अधिकारी एनबी सिंह को काफी राहत दी है. पूछताछ के दौरान उसका मोबाइल फोन तक नहीं लिया गया.

30 जनवरी 2018 को सीबीआई ने बीएसएफ के एक कमांडेंट के खिलाफ पशु तस्करी का केस दर्ज किया था. सीबीआई ने कमांडेंट जेबू डी मैथ्यू के पास से 45.65 लाख रुपये भी बरामद कर लिए. जांच में सामने आया कि यह राशि उसने बांग्लादेश के पशु तस्करों से ली है. वर्मा ने बीएसएफ के अफसर का पूरा बचाव किया.

हरियाणा के नागली उमरपुर और टिगरा उल्लावास में जमीन अधिग्रहण केस में 36 करोड़ रुपये की कथित तौर पर घूस दी गई थी. बताया गया है कि इस मामले से जुड़े अधिकारी टीसी गुप्ता, कंपनी मालिक ललित गुप्ता, सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार और डायरेक्टर आलोक वर्मा के बीच कथित तौर पर जबरदस्त लाइजनिंग रही है.

इसके अलावा सीवीसी के सामने ये बातें भी आई

बताया गया है कि राकेश अस्थाना व अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज होने से पहले आलोक वर्मा को इशारों में सूचित कर दिया गया था कि इस केस में रॉ के लिए काम करने वाले एजेंट भी हैं, इसलिए वे इस केस में बहुत गहराई से अध्ययन करने के बाद ही आगे बढ़े. सूत्रों की माने तो मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के अलावा कई अन्य लोग रॉ की मदद कर रहे थे. मनोज प्रसाद ने तो रॉ के कई बड़े टॉस्क पूरे किए थे. उन्होंने पाक के पूर्व राष्ट्रपति को लेकर कई अहम जानकारियां हासिल की थी. साथ ही देश के कई बड़े नौकरशाह, जो विदेशों में अपने भारी निवेश को लेकर सरकार के निशाने पर थे, उनकी सूचनाएं भी एजेंसी को दी थी. कई बार ये एजेंट हनी ट्रैप की मदद से उनके खातों की जानकारी लेते थे. वर्मा ने इन बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और बिना सोचे समझे सबको जांच के दायरे में ले लिया. इस प्रकार वर्मा के खिलाफ राकेश अस्थाना की चिट्ठी तथा रॉ का मामला सीवीसी के सामने आया और सीवीसी द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर सेलेक्ट कमेटी ने वर्मा को सीबीआई से बाहर र दिया.

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