समाजवाद की बात करते नेता के पास कहां से आये 200 करोड़ ? बेनकाब हो रहे तमाम चेहरे

वो बात तो करते थे समाजवाद की, पिछड़ों गरीबों के हक़ की लेकिन इस समाजवाद की आड़ में वो अपना खजाना भर रहे थे. हम बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के नेता, पूर्व मंत्री तथा अखिलेश यादव के करीबी शिव कुमार राठौड़. आपको बता दें कि सपा नेता तथा पूर्व मंत्री शिवकुमार राठौड़ घोटाले में फंसे हुए हैं. जब उनके घोटालों की जांच हुई तो उनकी 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति की खुलासा हुआ है. यहाँ सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर वो कौन सा समाजवाद है जिसके द्वारा सपा नेता ने 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बना ली.

आपको बता दें कि सपा नेता और पूर्व मंत्री शिव कुमार राठौड़ के सलोनी ग्रुप पर आयकर छापेमारी करीब 55 घंटे तक चली. आयकर विभाग की जांच शाखा ने वित्तीय अनियमितताओं के कई साक्ष्य हासिल किए. इसके आधार पर ग्रुप के एमडी और सहयोगियों पर टैक्स लगाने की कार्रवाई की जाएगी. एक अनुमान के मुताबिक, विभाग को 200 करोड़ से भी ज़्यादा की अघोषित आय के कागजात मिले हैं. ये भी पता चला है कि फर्जीवाड़ा करने को कई डमी पार्टनर और निदेशक इस्तेमाल किए गए. मजदूर गंगाराम को एक फर्म का पार्टनर तक दिखा दिया गया. वहीं, दिल्ली में स्थित पंजीकृत कंपनी का ऑफिस खटिया पर चलता मिला. इस ग्रुप के सहयोगी संतोष कुमार शर्मा ने 12 करोड़ की अघोषित आय मान भी ली है. इस आय पर अब टैक्स की कार्रवाई होंगी. वहीं, एक अन्य सहयोगी बुलंद हाउसिंग ग्रुप के पीएल शर्मा के अनुरोध पर उनके यहां सर्च की कार्रवाई अस्थाई रूप से रोककर प्रोहिबिटरी आर्डर लगा दिया गया है.

IT की छापेमारी के दौरान छापेमारी के दौरान फर्जीवाड़े की एक के बाद एक पर्तें खुलती गई. राठौड़ की दूसरी कंपनी आरपी इंफ्रावेंचन का खेल देखकर तो अधिकारी भी चौक गए. इसमें एक पार्टनर झांसी का मजदूर निकला. एक से दूसरा, दूसरे से तीसरा तैयार करते हुए इस प्रकार से फर्जीवाड़े की चेन तैयार की गई कि लाभ उठाने वाले असली व्यक्ति तक कोई पहुंच ही न सके. आर पी इंफ्रावेंचन ने इनर रिंग रोड का ठेका लेने के बाद सब कांट्रेक्ट के लिए दस फर्में कागजातों में दिखाई. यह भी डमी लोगों से ही बना दी गई. इनमे से ही एक फार्म के पार्टनर गंगाराम निकले जो पेशे से मजदूर है. उसने पूछताछ में बताया कि उससे केवल चेक पर साइन कराये जाते थे, उसे किसी भी कंपनी की जानकारी नही.

पता चला है कि जोधपुर की सरन कंस्ट्रक्शन के लगभग 20 करोड़ के ठेके में डमी सब कॉन्ट्रेक्टर दिखा दिए गए. कंपनी ने कागजात के लिए कोई निर्माण सामग्री नहीं खरीदी. ऐसेट के नाम पर सिर्फ एक रिवाल्वर थी. इतना ही नहीं फर्जीवाड़ा करने के लिए बड़ी राशि का टीडीएस दियास उसके बाद इस राशि का रिफंड भी हासिल कर लिया गया. छापेमारी के दौरान आयकर टीमों को चार ठिकानों पर 1.39 करोड़ रुपये की नकदी मिली. इसमें से 92 लाख का कोई श्रोत ना मिलने की वजह से उन्हें सीज कर दिया गया. वही, इनके यहां से 2.30 करोड़ की ज्वेलरी भी मिली है, जिसमे से 13 लाख रुपये के जेवर खरीद के श्रोत ना मिलने के कारण सीज कर दिए गए.

इसके अलावा सलोनी ग्रुप और उसके सहयोगियों के चार अन्य लाकर भी सीज किये गये हैं. शिव कुमार राठौड़ का कद सपा सरकार में इतना बड़ा था कि इस पर हाथ डालने की किसी ने हिम्मत तक नहीं की. इतना कि नहीं आयकर के छापे के दौरान भी शिव कुमार राठौड़ ने अपनी रसूक और राजनीति का प्रभाव अधिकारियों पर डालने की कोशिश की. अधिकारियों की मानें तो जरूरत पड़ने पर प्रवर्तन निदेशालय समेत अन्य सरकारी जांच एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है.

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