फिर हुआ गांधी वध, हिन्दू महासभा की नेता ने गांधी के पुतले को मारी गोलियां तथा मनाया जश्न

मोहनदास करमचंद गांधी की पुण्यतिथि पर हिन्दू महासभा के एक सनसनीखेज कदम से सियासी भूचाल मच गया. अखिल भारतीय हिंदू महासभा के सदस्यों ने अलीगढ़ में आज 30 बुधवार को महात्मा गांधी की 71वीं पूण्यतिथि पर उनके वध का जश्न मनाया. गांधी की पुण्यतिथि पर हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने उनकी हत्या के सीन को रीक्रिएट करते हुए गांधी के पुतले को गोली मारी फिर उसका दहन किया. इस दौरान हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने ‘महात्मा नाथूराम गोडसे अमर रहे’ के नारे भी लगाए.

खबर के मुताबिक़, अखिल भारतीय हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे तथा अन्य कार्यकर्ताओं ने गांधी की पुण्यतिथि को शौर्य दिवस के रूप में मनाया. हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे ने कृत्रिम बन्दूक से गांधी के पुतले को एक के बाद एक तीन गोलियां मारी तथा इसके बाद गांधी के पुतले को दहन भी किया. हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं ने गांधी के पुतले पर लाल रंग भी लगाया जिसे रक्त के प्रतीक के रूप में बहाया. इस दौरान उन्होंने गोडसे को माला पहनाई और गांधी वध की याद में मिठाई भी बांटी.

गांधी के पुतले को तीन गोलियां मारने के बाद हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पाण्डेय ने कहा कि अगर गांधी जीवित रहते तो देश का एक और विभाजन होता. इस दौरान पूजा शकुन पाण्डेय ने नाथूराम गोडसे को महात्मा की उपाधि देते हुए उनकी तुलना भगवान श्रीकृष्ण से की तथा कहा कि श्रीकृष्ण के रास्ते पर चलते हुए नाथूराम गोडसे ने गांधी का वध किया और देश को एक और विभाजन से बचा लिया.

बता दें कि 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली स्थित बिड़ला हाउस के परिसर में गांधी की हत्या की गई थी. गांधी की हत्या के मामले में नाथूराम गोडसे सहित 8 लोगों को साजिश में आरोपी बनाया गया था. मामले में 5 अभियुक्तों में से तीन- गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा और विष्णु रामकृष्ण करकरे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि दो- नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे को फांसी दी गई. 15 नवम्बर 1949 को गोडसे और आप्टे को अम्बाला जेल में फांसी दे दी गई.

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