अमेठी में किसको देख लगा “इटली वापस जाओ” का नारा ? क्या ढह जाएगा किला ?

एकतरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत का दम भर रहे हैं लेकिन हकीकत मैं खुद उनका किला दरकता हुआ दिखाई दे रहा है. हम बात कर रहे हैं राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी की, जहाँ राहुल गांधी के खिलाफ जनता का गुस्सा अब खुलकर दिखने लगा है. बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी पहुंचे जहाँ उन्हें किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ा. किसानों ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया और ‘इटली वापस जाओ’ के नारे लगाए. किसानों ने कहा कि उनको राहुल गांधी की जरूरत नहीं है.

जिस तरह से पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी तथा हार के बाद भी वह अमेठी से दूर नहीं गई हैं बल्कि लगातार अमेठी पहुँचती रही हैं, लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं के निदान का प्रयास करती रही हैं, उसे देखते हुए इस बार राहुल गांधी की राह बेहद ही कठिन नजर आती है. और जिस तरह से किसानों राहुल गांधी के खिलाफ “इटली वापस जाओ” के नारे लगाये, उससे लगने लगा है कि गांधी परिवार का सबसे मजबूत किला इस बार ढह सकता है.

नाराज किसानों ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की ‘ या तो राजीव गांधी फाउंडेशन को दी गई उनकी जमीन वापस की जाए या फिर वे रोजगार दें’. प्रदर्शन कर रहे एक किसान संजय सिंह ने कहा, ‘हम राहुल गांधी से निराश हैं, उनकी यहां कोई जरूरत नहीं है, वे यहां के लायक नहीं है, राहुल गांधी ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया.’ उन्होंने सम्राट साइकिल स्टोर के सामने धरना प्रदर्शन किया जिसका पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा उद्घाटन किया था. उस वक्त राजीव गांधी अमेठी से लोकसभा सांसद थे. 1980 में कौसर के औद्योगिक क्षेत्र में करीब 65.57 एकड़ से ज्यादा जमीन जैन ब्रदर्स ने ले ली थी. ये जमीन एक कंपनी चलाने के लिए ली गई थी.

रिकॉर्ड के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम ( UPSIDC) ने 65.57 एकड़ जमीन लीज पर दी थी. लेकिन ये कंपनी बंद हो गई जिसके बाद 20.10 लोन की रिकवरी के लिए अधिकरण ने इसकी नीलामी कर दी थी. इस नीलामी में ये जमीन राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने डेढ़ लाख की स्टाम्प ड्यूटी चुकाकर खरीद ली थी. हालांकि बाद में इस नीलामी प्रकिया को अवैध घोषित कर दिया था. कागजों पर ये जमीन तो UPSIDC के पास है लेकिन ये अभी भी राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के कब्जे में ही है.

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