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“जब मेरे अब्बू भारतीय सेना के खिलाफ जिहाद शहीद हुए थे तब मैं भी यही करूंगा”..बोलकर शोएब शामिल हो गया इस्लामिक आतंकी दल हिजबुल मुजाहिदीन में

उसने हिन्दुस्तान की हवा में सांस ली, हिंदुस्तान की माटी में पला बढ़ा, हिंदुस्तान की सरकार से मिलने वाली सभी सुविधाएं ली तथा इसके बाद हिंदुस्तान की बर्बादी का संकल्प लेते हुए उसने हथियार उठाये तथा इस्लामिक आतंकी दल हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया. हिजबुल में शामिल होने वाला कश्मीरी युवक लोन उत्तराखंड के देहरादून से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था लेकिन इसके बाद उसने हिंदुस्तान को रंक्तरंजित करने का निश्चय किया है.  आतंकी बने छात्र शोएब लोन का पिता भी आतंकी रहा है. 90 के दशक में लोन के पिता को सेना ने मार गिराया था. छात्र अपनी मां की तबीयत खराब होने और दोस्त की शादी की बात कहकर अपने इंस्टीट्यूट से छुट्टी पर गया था, लेकिन वह निकलने के बाद घर ना पहुंचकर आतंकी संगठन में शामिल हो गया.

शोएब लोन के आतंकी बनने के बाद केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ ही मिलिट्री इंटेलीजेंस और सेना ने देहरादून में संपर्क साधा है. यह छात्र बीते 20 सितंबर को दून से कश्मीर के लिए निकला था, उसके बाद से उसका पता नहीं है. देहरादून में पढ़ाई कर रहा शोएब लोन कश्मीर में सक्रिय आतंकी सगठनों के संपर्क में कैसे आया? क्या यहां स्लीपर सेल ने मौजूद रहकर उसे आतंकवाद के प्रति प्रेरित तो नहीं किया या सोशल साइटों और अन्य माध्यम के जरिए वह आतंकवाद से जुड़ा? इन तमाम सवालों के जवाब के लिए इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के साथ ही मिलिट्री इंटेलीजेंस जांच में जुट गई हैं. खबर के मुताबिक़, कश्मीरी छात्र का पिता 90 के दशक में आतंकी सगठन से जुड़ने के बाद मारा गया था. आतंकी हमले में मारे जाने के कारण आतंकी संगठन उसे भी अपनी पोस्टों में शहीद का दर्जा देते हैं. सोशल साइटों पर चल रहे शोएब लोन के फोटों में पिता अरशद हुसैन के नाम के साथ भी शहीद लगाया गया है.

जम्मू-कश्मीर के बुमराट (कुलगाम) का रहने वाला छात्र शोएब अहमद लोन नंदा की चौकी स्थित एल्पाइन इंस्टीट्यूट में बीएससी (आईटी) पांचवें समेस्टर का छात्र है। बीते जून में परीक्षा देकर घर गया शोएब सितंबर में वापस दून स्थित संस्थान लौटा। यहां तीन या चार दिन रुकने के बाद 20 सितंबर को मां की तबीयत खराब होने के साथ ही दोस्त की शादी की बात कही और चंडीगढ़ से श्रीनगर की फ्लाइट से शोएब फिर चला गया। दून से 20 सितंबर को रवाना होते ही सीधे जाकर वह कश्मीर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ गया। कुलगाम में शोएब की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद उसकी आतंकी संगठनों से जुड़ने का पता लगा तो उस पर आतंकियों पर लगाए जाने वाली धारा 121 (भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना) के तहत भी अभियोग दर्ज कर लिया गया है.

संस्थान के निदेशक डा. एसके चौहान ने बताया कि छात्र को लेकर सारी जानकारी और उसके दाखिले से जुड़ी फाइल सेना को उपलब्ध करा दी गई है. उन्होंने कहा कि अभी वह शोएब के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकते हैं क्योंकि सेना और पुलिस इस मामले की पड़ताल कर रहे हैं. अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार का कहना है कि शोएब को लेकर जुटाई जा रही जानकारी को जल्द सार्वजनिक किया जाएगा. कश्मीर से लोन से कौन-कौन मिलने आया, क्या उनमें कोई आतंकी चेहरा था या नहीं, यहां रहने के दौरान वह कैसे आतंकियों से संपर्क में आया। वह फोन या व्हट्सएप के जरिए विदेश में संपर्क तो नहीं करता था। पुलिस और इंटेलीजेंस ने इस तरह के सवाल तलाशने के लिए उसके हॉस्टल संचालक, वार्डन, स्कूल के डीन, उसके साथी छात्रों से भी उसके बारे में जानकारी जुटाई है, लेकिन उसका आतंकी कनेक्शन जुटाना पुलिस के बड़ी मुसीबत बना हुआ है। पुलिस ने कश्मीर के साथ ही सेलाकुई में उसके परिचित छात्रों से उसकी जानकारी के लिए सवाल करने शुरू कर दिए हैं.

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