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विपक्ष ने लिया भारत की आज़दी के पहले “ईसाई” स्वतंत्रता सेनानी का नाम ..नाम पढ़िए और बताइये कि क्या आप भी मानते हैं इन्हे स्वतंत्रता सेनानी ?

बीजेपी सांसद गोपाल शेट्टी के एक बयान से विवाद पैदा हो गया है. उन्होंने कहा है कि ईसाई अंग्रेज हैं और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनका कोई योगदान नहीं रहा है . “ईसाई अंग्रेज थे, इसलिए उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया. इस मामले में अब कांग्रेस ने संभाल लिया है मोर्चा और खुल कर आ गयी है समाने . यद्द्पि अभी तक कांग्रेस की तरफ से भगवा आतंक सभद पर माफ़ी नहीं मांगी गयी है .

विदित हो की कांग्रेस के सहयोगी दल शरद पवार ने गिनाया है आज़ादी की लड़ाई में पहले ईसाई स्वतंत्रता सेनानी का नाम और वो नाम है “एनी बेसेंट”  का . बतौर शरद पवार संघ से जुड़े लोग अंग्रेजो के गुलाम थे और उन्हें आज़ादी की लड़ाई की कहीं से कोई भी जानकारी नहीं है .. शारद पवार ने कहा की आज़ादी की लड़ाई में ईसाई मत कोई अनुयाई एनी बेसेंट का बहुत ही बड़ा योगदान है जिसे कोई संघी नहीं जान सकता है .

फिलहाल इसी बयान में शरद पवार ने पाकिस्तान और भारत को एक जैसा बता दिया जिस पर पहले से ही मचा हुआ है बवाल . सोशल मीडिया का बड़ा हिस्सा शरद पवार के इस बयाना के बाद दो भागों में बंट गया है . एक बड़े धड़े के अनुसार एनी बेसेंट का कार्य ऐसा कतई नहीं था जो उन्हें भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी के रूप में गिना जाय और अगर ऐसा होता है तो ये भगत सिंह , बिस्मिल और आज़ाद जैसे योद्धाओ का अपमान होगा . सोशल मीडिया पर ये भी सवाल उठा है की कांग्रेस 1857 के वीरों के अलावा खुदीराम बोस जैसी योद्धाओ को क्या मानती है जिनके वीरगति स्थल पर जाने से कभी खुद नेहरू ने इंकार कर दिया था . वही कांग्रस और आम आदमी पार्टी के कई समर्थक इस बात को मान रहे हैं की एनी बेसेंट एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थी और उनका आज़ादी की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान था .

 


 

 

 

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