या तो शरिया या फिर विभाजन… बनाया जा रहा सन 1947 वाला माहौल

क्या एक बार फिर से हिन्दुस्तान को विभाजित करने की साजिश रची जा रही है? क्या शरिया कोर्ट की बात करना एक बार फिर से देश के टुकड़े करना है ? क्या शरिया कोर्ट के बहाने देश में 1947 का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है ? शायद संकेत तो ऐसे ही मिल रहे हैं और समय रहते अगर इस पर काबू न पाया गया तो संभवतः मजहबी कटटरपंथी हिंदुस्तान को एक बार फिर से 1947 जैसी स्थिति में जाकर खड़ा कर देंगे क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा शरिया कोर्ट लगाने की बात करने के बाद एक इस्लामिक मुफ्ती ने जो ब्यान दिया है वो साफ़ साफ़ इशारा करता है कि इनके दिमाग में चल क्या रहा है.

आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर के डिप्टी ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने कहा है कि अगर मुसलमानों को शरिया कोर्ट की इजाजत नहीं दी जा रही है तो फिर मुसलमानों को अलग देश दे दिया जाए. हम वहां शरिया लागू करेंगे. मुफ्ती ने कहा कि बीजेपी को देश में शरिया अदालतों से समस्या है तो हमें (मुस्लिमों) को अकेला छोड़ देना चाहिए. डिप्टी ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम जम्मू-कश्मीर शरिया कोर्ट के उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने देश के सभी जिलों में AIMPLB द्वारा शरिया कोर्ट के विस्तार किए जाने का समर्थन किया है. मुफ्ती ने कहा कि अगर बीजेपी को हमारी धार्मिक प्रक्टिस से समस्या है, तो उन्हें हमें अकेला छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत में करीब 20 करोड़ मुस्लिम आबादी है, जिन्हें धार्मिक प्रैक्टिस और विश्वास को मानने से रोका नहीं जा सकता है.

मुफ्ती नासिर ने कहा कि हमें धार्मिक आजादी से रोका गया तो फिर भारत के मुसलमानों को 1947 जैसे देश के विभाजन के लिए सोचना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने लिए अलग राष्ट्र बनाने के बारे में सोचें. उन्होंने कहा कि या तो हमें शरिया लागू करने दो या फिर हिन्दुस्तान का विभाजन करके मुस्लिमों को अलग देश दे दो.

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